ये सभी जम्मू की ओर आई-20 कार से आ रहे थे। गाड़ी एडवोकेट चला रहा था। तलाशी के दौरान गाड़ी से एक एके 47 राइफल, तीन पिस्टल, गोलियां और विस्फोटक बरामद किया गया था। एनआईए ने 17 जनवरी को मुकदमा कायम किया।
जांच के दौरान इन चारों आरोपियों से पूछताछ के बाद कश्मीर घाटी और जम्मू में 15 स्थानों पर छापामारी की गई। अलग-अलग दिन तीन अन्य आरोपी सैय्यद इरफान अहमद (नवीद का भाई), तनवीर अहमद वानी व तारिक अहमद मीर को गिरफ्तार किया गया। इन तीनों को हिजबुल मुजाहिदीन को फंड मुहैया कराने और हथियारों व विस्फोटकों की सप्लाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
जांच में पता चला कि फरवरी 2019 में नवीद बाबू को तत्कालीन डिप्टी एसपी दविंदर सिंह ने जम्मू में सुरक्षित पनाहगार उपलब्ध कराया। नवीद के साथ एडवोकेट और सैयद इरफान अहमद भी थे। दविंदर सिंह खुद के वाहन से हिजबुल आतंकियों को पहुंचाता था।
उसने हथियारों की खरीद में मदद का भी भरोसा दिलाया था। पाकिस्तान घाटी में लगातार आतंकी गतिविधियों के लिए हिजबुल मुजाहिदीन को पैसे, हथियार और अन्य सुविधाएं मुहैया करा रहा है। आरोप पत्र में कहा गया है कि तारिक अहमद मीर के खिलाफ जांच चल रही है।