दलाई लामा ने कहा कि आज के दौर में सैन्य इस्तेमाल प्रासंगिक नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 16वें दौर की वार्ता 17 जुलाई को होने की उम्मीद है।
तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि भारत व चीन को देर-सवेर अपने विवाद बातचीत से हल करने होंगे। आज के दौर में सैन्य इस्तेमाल प्रासंगिक नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 16वें दौर की वार्ता 17 जुलाई को होने की उम्मीद है।
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दोनों देशों के बीच 2020 में एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के पास गलवां घाटी में हुई झड़पों के बाद से जारी तनाव को कम करने के मद्देनजर ये बैठकें हो रही हैं। 14वें दलाई लामा जम्मू के बाद लद्दाख पहुंचे। वह बृहस्पतिवार को धर्मशाला से रवाना हुए थे।
दलाई लामा अपने 15 दिवसीय आधिकारिक दौरे के तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दौरे पर हैं। दलाई लामा का 2020 में फैले कोरोना संक्रमण के बाद धर्मशाला से बाहर यह पहला दौरा है। इससे पहले जम्मू में उन्होंने कहा था कि चीन में बहुसंख्यक लोग अब यह मानने लगे हैं कि वह चीन से आजादी नहीं चाहते, बल्कि एक सार्थक स्वायत्तता चाहते हैं और तिब्बती बौद्ध संस्कृति का संरक्षण चाहते हैं।
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सरकार ने कहा-किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए
वर्ष 2018 में जन्मदिन मनाने के चार साल बाद लद्दाख में प्रवास के लिए पहुंचे तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का शुक्रवार को अनुयायियों ने भव्य स्वागत किया। लेह एयरपोर्ट से लेकर पूरे रास्ते में लोग उनके स्वागत में खड़े नजर आए। दिल्ली में सरकारी प्रवक्ता ने कहा, यह उनकी धार्मिक यात्रा है, इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। ऐसा पहली बार नहीं है कि दलाई लामा सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। वह पहले भी पहले भी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश का दौरा कर चुके हैं।j