स्वच्छ भारत अभियान के तहत साफ-सफाई का संकल्प लेने वाले कठुआ शहर के पास कचरा निस्तारण के इंतजाम नदारद हैं। जिला मुख्यालय में रोजाना सफाई होती है, लेकिन टनों के हिसाब से कचरे को रावी दरिया में फेंक दिया जाता है। यह हाल तब है जब शहर के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट प्लांट को मंजूर हुए पूरा एक दशक बीत गया है। हैरत की बात है कि लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की राशि नगर परिषद के पास मौजूद है, लेकिन प्लांट के लिए भूमि हस्तांतरण की फाइल धूल फांक रही है।
दरअसल कठुआ शहर के तमाम वार्डों से रोजाना बड़े पैमाने पर कचरा निकलता है। इस कचरे के स्थाई निस्तारण के लिए यूआईडीएसएसएमटी योजना के तहत 1.46 करोड़ की लागत से प्रस्तावित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को मंजूर किया गया था। केंद्रीय योजना अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम फॉर स्मॉल एंड मीडियम टाउन के तहत वर्ष 2004 में कठुआ के लिए प्लांट मंजूर किया गया। वर्ष 2006 में सहार खड्ड क्षेत्र की बारह कनाल भूमि को प्लांट विकसित करने के लिए चुना गया। टेंडर प्रक्रिया के बाद बाकायदा निर्माण भी शुरू हुआ लेकिन बाढ़ के पानी से निर्माण बह गया।