अलगाववादियों की बंद की घोषणा के बाद श्रीनगर में सभी व्यापारिक संस्थान बंद रहे। इसका असर घाटी के अन्य स्थानों पर भी देखा गया। अलगाववादियों ने यह घोषणा 1931 में डोगरा सेना की ओर से फायरिंग के दौरान मारे गए 22 मुस्लिम युवकों की याद में की थी।
हालात बिगड़ने की आशंका के चलते उत्तरी कश्मीर के शोपियां जिले में कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया था। श्रीनगर के सात थाना क्षेत्रों में पाबंदियां रहीं। इसके अलावा अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम जिलों में भी कर्फ्यू जैसे हालात रहे।
अलगाववादियों के बंद का असर लगभग समूची घाटी में देखने को मिला। लोगों ने सोपोर और हंदवाड़ा में प्रदर्शन किया और पुलिस पर पथराव किया। सुरक्षा बलोें ने प्रदर्शनकारियों पर शिकंजा भी कसा।