विजयपुर। क्षेत्र में शनिवार को महाकाल भैरव अष्टमी मनाई गई। लोगों ने बताया कि यह भगवान शिव का रौद्र रूप है। शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव प्रकट हुए। इसलिए इसे काल भैरव अष्टमी भी कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति काल भैरव की पूजा-अर्चना करता है, उसके पिछले जन्म और मौजूदा जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं। मृत्यु के बाद काल भैरव के भक्तों को भगवान शिव के पास जगह मिलती है। ऐसा भी माना जाता कि काल भैरव के भक्तों को शिवलोक में स्थान प्राप्त होता है। जिस व्यक्ति की मृत्यु काशी में होती है, उसे यमदूत अपने साथ नहीं ले जाते, क्योंकि वहां यम का शासन नहीं चलता है। संवाद