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Jammu News: पंजाब, हिमाचल प्रदेश के श्रद्धालुओं को भी रहता है रथखड़ा मेले का इंतजार

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घगवाल के नृसिंह मंदिर में दशर्न करते श्रदालु - फोटो : SAMBA
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घगवाल। कस्बे के नृसिंह मंदिर में आठ दिवसीय रथ खड़ा मेला बुधवार को धार्मिक उत्साह और उल्लास के साथ शुरू हुआ। मेले में पड़ोसी प्रदेश पंजाब, हिमाचल प्रदेश के भी श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सुबह-सुबह मंदिर में भक्तों ने आकर नृसिंह भगवान के दर्शन किए। मेले के दौरान घगवाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया गया।
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बसोहली, डोडा, किश्तवाड़, बानी, डुडू बसंतगढ़ के पहाड़ी इलाकों के कुछ लोग इस दिन का इंतजार करते हैं, क्योंकि वह इस मेले में स्टाल लगाते हैं। हाथ से बनी ऊनी चीजें बेचते हैं। मंदिर परिसर में विभिन्न प्रकार के स्टाल लगाए गए थे। मंदिर समिति ने लंगर का आयोजन किया।
बीडीसी अध्यक्ष विजय टगोत्रा ने कहा कि घगवाल में पुरानी परंपरा के अनुसार आठ दिवसीय रथखड़ा मेला बुधवार से शुरू हो गया है। पहाड़ी क्षेत्र के लोग घर की बनी चीजों के साथ हस्तशिल्प के साथ मेले में भाग लेते हैं। वे मेले में कंबल और औजार जैसी वस्तुओं को बेचते हैं। उन्होंने कहा कि मेले के शुरू होने का वे पूरे साल बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रथखडा मेला आज से शुरू हो गया है जो सप्ताह भर चलेगा। आज से दिन और रात बराबर होंगे। वहीं आज से दिन बढ़ना शुरू होते हैं। जिला प्रशासन ने मेले के दौरान व्यवस्थाओं को भी जांचा। श्रद्धालुओं को असुविधा न हो इसके लिए सभी प्रबंध किए गए हैं।
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पौराणिक कथा के अनुसार ऋतु परिवर्तन के चलते मेले का आयोजन किया जाता है। आज के दिन कुछ पल सूर्य रुकता है। मंदिर में विराजमान नृसिंह भगवान और मां अन्नपूर्णा का कृषि के लिए बहुत महत्व माना जाता है। किसान जब भी अपनी फसल बोते हैं तो नृसिंह भगवान के नाम से अच्छी तरह तैयार खेतों में बीज डालते हैं। उन्हें विश्वास है कि नृसिंह भगवान उनकी फसलों का अच्छा अंकुरण सुनिश्चित करेंगे, अच्छी फसल होगी, सभी प्राकृतिक आपदाओं से उनकी फसलों की रक्षा करेंगे और बंपर पैदावार सुनिश्चित करेंगे। इसके अलावा, अनाज की कटाई के बाद इसका कुछ हिस्सा नृसिंह जी मंदिर में चढ़ाया जाता है। वहीं गंडमूल जन्मे बच्चे को मंदिर में चढ़ाया जाता है। जिसे दान देकर वापस लेते हैं।
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