बाड़ी ब्राह्मणा के डोलियां क्षेत्र में छठ पूजा करते व्रती।
बाड़ी ब्राह्मणा। छठ महापर्व का उत्साह रविवार को बाड़ी ब्राह्मणा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर देखा गया। व्रती पूरे परिवार के साथ नए वस्त्र पहनकर पहुंचे। यहां तक व्रती घर से सभी तरह के फल, स्वादिष्ट पकवान ठेकुआ, गन्ना आदि टोकरे में लेकर घर से नंगे पैर पूजा स्थल तक पहुंचे।
छप महोत्सव को लेकर व्रतियों के लिए सिडको मैदान में नहर बनाई गई। इसमें पानी के बीच खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया और छठ मईया की पूजा की गई। शाम ढलते ही सिडको मैदान में लोगों का आना-जाना शुरू हो गया। कमेटी की तरफ से व्रतियों के लिए पूजा के लिए बनाए गए स्थल और नहर के किनारे सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बंदोबस्त किया गया। दूसरी ओर मैदान में मेले जैसा आयोजन किया गया। कमेटी की तरफ से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन रखा गया। इसमें कलाकारों ने नाच गाकर गाना बजा कर समा बांधा। हर कोई महोत्सव को आनंदमय तरीके से मना रहा था। मैदान में हर तरफ उल्लास और उमंग के साथ लोग अलग-अलग किस्म के लगाए गए स्टालों पर खरीदारी कर रहे थे। छठ महोत्सव को मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए।
दूसरी तरफ तेली बस्ती से निकल रही नहर डोलियां से आगे तक जा रही है। इस नहर के आसपास कई स्थानों पर छठ पूजा के लिए स्थल बनाए गए। जहां व्रतियों ने आस्था के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। नहर में तीन दिन पहले तो पानी नहीं छोड़ा गया था, लेकिन व्रतियों की आस्था को देखते हुए नहर में पानी छोड़ा गया। व्रतियों ने इस पानी में खड़े होेकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। साथ ही बनाए गए पूजा स्थल पर पूजा की। छठ महापर्व में व्रती के परिवार के सभी सदस्य उत्साह के साथ पहुंचे। पूजा स्थल को भी रंगबिरंगी झंडी से सजाया गया। डीजे की धुन पर छठी मईया के गीत बजाए गए, और लोगों में प्रसाद का वितरण किया गया।
व्रतियों द्वारा देर शाम तक सूर्य देवता और छठ माता की पूजा अर्चना की गई वही की 25 तारीख सोमवार को सूर्य उदय होने के उपरांत ही व्रतियों द्वारा अपना व्रत छठ माता की पूजा करने के बाद तोड़ दिया जाएगा और उसके साथ छठ महोत्सव का समापन कर दिया जाएगा
छठ महापर्व : व्रतियों ने दिया डूबते सूर्य को अर्घ्य
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कस्बे के चीची माता मंदिर के सामने बसंतर दरिया में रविवार को छठ महापर्व के उपलक्ष्य में शाम को पानी में खडे़ होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। व्रतियों के अनुसार जब तक उन्हें डूबते सूर्य के दर्शन नहीं होते वह पानी में ही खडे़ रहते हैं।
उनके अनुसार छठ पर्व उनके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। व्रती तीन दिन तक व्रत रखती हैं। अंतिम दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा करेंगे। उसके बाद जल ग्रहण करेंगे। पूजा के लिए अलग से स्थान बनाया गया।े