आरएस पुरा / मीरां साहिब। धनतेरस को लेकर मंगलवार को बाजार में रौनक नजर आई, जिससे दुकानदारों को भी कारोबार बेहतर रहने की उम्मीद बंधी। भीड़ के चलते कई बार बाजार में जाम की स्थिति बनी। पुलिस व्यवस्था बनाने में जुटी रही।
बाजारों में सुबह दस बजे से खरीदारों का आना शुरू हो गया है। विशेषकर सर्राफा, बर्तन, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, सजावटी सामग्री, पटाखा, किराना, लक्ष्मी जी की मूर्तियों-दीपकों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी रही। वहीं शॉपिंग मॉल में भी ग्राहकों की भीड़ रही। लोग किराना, कपड़े, पटाखे, टीवी, मोबाइल, वॉशिंग मशीन, अलमारी, फर्नीचर समेत घरों को सजाने के लिए सजावटी वस्तुएं खरीद रहे थे। आरएस पुरा बाजार एसोसिएशन के प्रधान सचिन चोपड़ा ने बताया कि कि ड्राईफ्रूट व मिठाई का बाजार सजा है। लोग मिठाई की खरीदारी कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य सामग्रियों की भी खरीदारी हो रही है। धनतेरस पर भी कारोबार बेहतर रहा। दीपावली के लिए लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं। धनतेरस के लिए बर्तनों व सर्राफा की दुकानों पर अच्छी भीड़ रही। धनतेरस पर सोना, चांदी जैसी महंगी धातुओं के साथ-साथ पीतल के बर्तन और झाड़ू खरीदने की परंपरा है।
पंडित गरीश चंद्र ने बताया कि दरअसल, धनतेरस सुख, समृद्धि और आरोग्य का पर्व है। इसी दिन आरोग्य के देवता धंवंतरि अवतरित हुए थे। सेहतमंद रहने के लिए सफाई जरूरी है और कहा जाता है कि जहां सफाई होती है वहीं लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए यह मान्यता है कि धनतेरस पर झाड़ू खरीदने से घर में लक्ष्मी आती है।
दीपावली पर गांवों में रहती थी धूम
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। पुराने जमाने में दीपावली पर काफी रौनक रहती थी। ग्रामीण मिलजुल कर पर्व मनाते थे। नौकरी पर गए लोग भी छुट्टी लेकर परिजनों के बीच पहुंच जाते थे। गांवों में हलवाई जलेबी बनाते थे। ग्रामीण खुशी-खुशी खरीद कर परजिनों के लिए ले जाते थे।
बाद में दुकानों पर दीपावली के ग्रीटिंग कार्ड आने शुरू हो गए। लोग रिश्तेदारों व दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड डाक से भेजते। घरों में मिठाई के साथ कार्ड भी दिया जाता। अब जमाने ने करवट ली तो सब कुछ छूट गया। बुजुर्ग रविदत्त शर्मा ने बताया कि पुराने जमाने में आपसी प्रेम व भाईचारा होता था। हिंदू मुस्लिम मिलजुल कर दीपावली की मुबारकबाद देते थे। कृष्ण चौधरी के अनुसार धन की कमी होने पर वह दीपावली पर बच्चों को छोटी पिस्तौल लाकर दे देते थे। बच्चे उसी में खुश रहते थे। परिवार के सदस्यों में भी काफी खुशी होती थी। सभी सदस्य इकट्ठे दीपावली मनाते थे।
राजकुमार के अनुसार दीपावली पर ग्रामीण मिट्टी के दीये जलाते थे। घरों व मकानों की छत पर दिए जलाए जाते थे। ग्रामीणों में आपसी प्रेम होता था। एक दूसरे को उनके घरों में जाकर जलेबी के साथ दीपावली की मुबारकबाद दी जाती थी। इस दिन कुछ लोग अपनी किस्मत आजमाने के लिए शौक के तौर पर ताश खेलते। अब जमाना बदला तो मोबाइल इंटरनेट के चलते वाट्सएप व फेसबुक पर ही दीपावली की मुबारक बाद दी जाती है।
दुकानदार मुस्काए, खूब हुई धन की वर्षा
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा/ घगवाल। जिले में धनतेरस पर दुकानदारोें के चेहरों पर मंगलवार को मुस्कान बिखरी दिखी। इस दैरान उनके यहां धन की खूब वर्षा हुई। लोगों ने जमकर बर्तन की खरीदारी की।
बर्तन विक्रेता व स्वर्णकार की दुकानों पर काफी भीड़ देखी गई। बर्तन स्टोर के ालिक रमण कुमार बिट्टा ने बताया कि धनतेरस की साल भर आस बनी रहती है। इस दिन बर्तनों की अच्छी बिक्री होती है। घगवाल व राजपुरा में भी गृहणियों ने जमकर खरीदारी की। गृहणी ममता, रजनी, विमला, पूजा देवी व मीनू ने बताया कि इस दिन घर में कोई नई वस्तु लाना शुभ होता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ। इसलिए इसे धनतेरस कहा जाता है। जब धन्वंतरि प्रकट हुए उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था। इसलिए इस वर्तन को खरीदने का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि उन्होंने सुबह सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा कर माता लक्ष्मी नाराजन पशु पूजा कुबेर पूजा कर विश्व की मंगलकामना की।