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मां सरस्वती की पूजा कर मांगी सुख शांति की दुआ

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अरनिया। वसंत पंचमी को लेकर मंगलवार को मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। वही विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर दुआएं भी मांगी।
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क्षेत्र के विद्वान सोनू पंडित के अनुसार वसंत पंचमी का त्योहार उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती का जन्म हुआ। इसलिए यह दिन सरस्वती पूजा का भी विधान है। इस दिन कई लोग प्रेम के देवता कामदेव की पूजा भी करते हैं। किसानों के लिए इस त्योहार का विशेष महत्व है। वसंत पंचमी पर सरसों के खेत लहलहा उठते हैं। चना, जौ, ज्वार और गेहूं की बालियां खिलने लगती हैं। इस दिन से वसंत ऋतु का प्रारंभ होता है। यूं तो भारत में छह ऋतुएं होती हैं, लेकिन वसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इस दौरान मौसम सुहाना हो जाता है और पेड़-पौधों में नए फल-फूल पल्लवित होने लगते हैं। इस दिन कई जगहों पर पतंगबाजी भी होती है। हालांकि धीरे-धीरे पतंगबाजी का प्रचलन धूमिल होता जा रहा है। इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा भी की जाती है, जिससे छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान करा कर उन्हें किताबें भी भेंट की जाती हैं। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। पीले चावल या पीले रंग का भोजन ग्रहण करना अति शुभ माना जाता है।
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वसंत पंचमी पर मंदिरों और घरों में हुई पूजा
अखनूर। सीमावर्ती क्षेत्र में वसंत पंचमी पर्व बड़ी धूमधाम और आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिरों और घरों में पूजा अर्चना करके लोगों ने भगवान से परिवार के सदस्यों की सुख शांति की कामना की।
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पुली वाले मंदिर, कामेश्वर मंदिर, जियो पोता मंदिर में विशेष पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने आस्था व्यक्त की। श्रद्धालुओं ने कहा कि वसंत पंचमी पर विशेष रूप से पूजा अर्चना की गई। पीले वस्त्र पहने और पीले रंग का खाना खाया। उन्होंने बताया कि इस दौरान मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया और भंडारा भी लगाया गया। संवाद
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