राजोरी। एसवीएस ज्ञान गंगा आश्रम राजोेरी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को श्रीकृष्ण महा रासलीला सहित गोपियों के अभिमान जैसे प्रसंगों का वर्णन किया गया।
इस दौरान महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी विश्वात्मानंद ने भगवान का आंतरिक ध्यान व गोपियों के हृदय में पुनः कृष्ण भाव उत्पन्न होना, कंस वध का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि जिसने परमात्मा को मन में बसा लिया, उसे परम सुख की प्राप्ति होती है। इस संसार में कोई किसी का नहीं होता। परमात्मा से नाता जोड़कर ही इस भवसागर से पार पाया जा सकता है। हरि नाम का सुमिरन करने के लिए कल का इंतजार नहीं करना चाहिए। जीवन में सुख-दुख की लहर लिए बृजवासियों को गिरिराज की पूजा करने के लिए प्रेरित किया और इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी उंगली पर गिरिराज को धारण कर समस्त बृजवासियों को बचाया। प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए। इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।