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Jammu News: थाली में सजी जम्मू-कश्मीर की विरासत, 35 प्रतिभागियों ने चखाया अपनी मिट्टी का स्वाद

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- कहीं गुम न हो जाएं-सीजन-9 में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और नेपाल के प्रतिभागियों ने बनाए पारंपरिक व्यंजन
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- राजमा-चावल से आगे दिखा जम्मू का स्वाद, कश्मीर का अखरोट हलवा और नेपाल की सेल रोटी ने खींचा ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। बदलते दौर में पारंपरिक व्यंजनों और उनसे जुड़ी संस्कृति को सहेजने के लिए रविवार को कला केंद्र जम्मू में राष्ट्रीय पाक कला प्रतियोगिता कहीं गुम न हो जाएं-सीजन-9 का आयोजन किया गया। माय स्टेट इन माय प्लेट थीम पर हुई प्रतियोगिता में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और नेपाल के 35 प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी रसोई की विरासत को व्यंजनों के माध्यम से सामने रखा।
किसी की थाली में डोगरी स्वाद था तो किसी ने कश्मीरी, लद्दाखी और नेपाली पकवानों से अपनी संस्कृति की पहचान कराई। ‘लेट्स गिव बैक’ की ओर से आयोजित प्रतियोगिता जम्मू-कश्मीर की चीफ कोऑर्डिनेटर रीना मुखर्जी और स्टेट कोऑर्डिनेटर कल्पना विनय की देखरेख में हुई। आयोजक के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर विजेता के लिए 1.5 लाख रुपये का पुरस्कार रखा गया है।
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राजमा-चावल से आगे जम्मू का स्वाद
जम्मू की बैंक कर्मचारी ने जिमीकंद की सब्जी और कियूर बनाकर संदेश दिया कि जम्मू का स्वाद सिर्फ राजमा-चावल तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
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अखरोट हलवे में कश्मीर की खुशबू
पूर्व सरकारी शिक्षिका प्रीति चौधरी ने अखरोट का हलवा और लौकी की यखनी तैयार की। उन्होंने कहा कि गृहिणी होना बड़ी जिम्मेदारी है और पारंपरिक व्यंजनों को सहेजना भी संस्कृति को बचाने जैसा है।
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जम्मू में बसी नेपाल की रसोई
नेपाल की विमला ने बांस का अचार, चटनी और सेल रोटी बनाकर अपनी मातृभूमि की पाक पहचान पेश की। उनका कहना था कि पारंपरिक भोजन अपनी जड़ों से जुड़े रहने का जरिया है।
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लद्दाख की थाली में स्क्यू और खुबानी
फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट की छात्रा इफत फातिमा ने स्क्यू, खुबानी का पेय और खुबानी की मिठाई बनाई। उन्होंने लद्दाख की स्थानीय खाद्य परंपरा को व्यंजनों के जरिए सामने रखा।
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गुच्छी से महकी भद्रवाह की थाली
भद्रवाह के होटल व्यवसायी यासिन ने प्रसिद्ध गुच्छी मशरूम की सब्जी समेत पारंपरिक पकवान तैयार किए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्वाद को आधुनिक मंच देना जरूरी है।
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10 साल की रुद्राक्षी ने भी पकड़ी करछी
चट्ठा की 10 वर्षीय रुद्राक्षी ने रोटी-सब्जी बनाकर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उसने कहा कि उसे खाना बनाना पसंद है और वह इसे आगे भी जारी रखना चाहती है। आयोजकों ने कहा कि ऐसे मंच पारंपरिक खान-पान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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शिवाली रानी बनीं राष्ट्रीय विजेता
प्रतियोगिता में शिवाली रानी ने राष्ट्रीय विजेता का खिताब अपने नाम किया। प्रतियोगिता में पूजा कपूर सूरी प्रथम रनरअप और मेहनाज बेगम द्वितीय रनर अप रहीं। विजेताओं ने अपने पारंपरिक व्यंजनों और पाक-कौशल के दम पर निर्णायक मंडल को प्रभावित किया।
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