अरनिया। कोरोना वायरस के चलते इस साल बैसाखी पर्व के बाद आने वाला दूसरा पर्व निर्जला एकादशी भी इस वायरस की महामारी की भेंट चढ़ गया। लॉकडाउन-4 अभी तक पूरी तरह से लागू रहने से जहां इस बार बिन भांगड़े के बैसाखी पर्व निकल गया। उसी तरह एकादशी पर्व भी लोगों की बिन प्यास बुझाए चला गया। कोरोना के चलते क्षेत्र में शीतल व मीठे जल की छबीले लगाना तो दूर संक्रमित होने के डर से किसी ने घरों के मुख्य द्वारों पर शीतल जल को गिलास में भी डाल कर नहीं रखा।
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निर्जला एकादशी पर एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं
विजयपुर। महिलाओं ने मंगलवार को निर्जला एकादशी का व्रत रखा और सत्यनारायण की पूजा अर्चना की। महिलाओं ने सुबह घरों में स्नान किया और लॉकडाउन का पालन करते हुए कन्याओं को घरों में भोजन कराने के साथ मीठा पानी पिलाया। क्षेत्र की गीता देवी, रेनू वाला, सीमा देवी, रूवी आदि ने बताया कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने और बर्तन, पंखी आदि दान करने से घर परिवार में पूरे वर्ष सुख शांति बनी रहती है और हर मनोकामना पूरी होती है। काली माता मंदिर करपालपुर (रामपुर) में चौधरी शमशेर सिंह, गंगा राम शर्मा और ग्रामीणों द्वारा छबील लगाई गई। इस दौरान सामाजिक दूरियों का भी पूरा ध्यान रखा गया। संवाद
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श्रद्धा के साथ मनाई निर्जला एकादशी
अखनूर। निर्जला एकादशी क्षेत्र में श्रद्धा के साथ मनाई गई। हालांकि कोरोना की वजह से लोगों ने घरों में ही पूजा अर्चना की। इसमें अपने देवी देवताओं और पूर्वजों को याद किया। लोगों का कहना है कि इस बार कोरोना के चलते घरों में ही पूजा की गई। पहले बाजारों और चौराहों में जगह-जगह लोगों को शीतल जल और खाना खिलाते थे। मगर इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। संवाद
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निर्जला एकादशी पर कोरोना का साया
परगवाल। सीमा क्षेत्र परगवाल में मंगलवार को निर्जला एकादशी पर कोरोना का साया साफ नजर आया। जहां इतने बड़े पर्व पर कहीं भी छबील और न ही कहीं लंगर का लगाया गया, जिससे इस बार क्षेत्र में यह पर्व फीका रहा। हालांकि लोगों ने निर्जला एकादशी का व्रत रखकर सुख समृद्धि के लिए कई प्रकार के दान किए, लेकिन छबील लगाकर लोगों को पानी पिलाने के लिए जानी जाने वाली निर्जला एकादशी का पर्व इस बार फीका रहा। जेठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी पर हमेशा मंदिरों में गूंजने वाली घंटियां भी खामोश रहीं। संवाद
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महिलाओं ने भजन कीर्तन कर की पूजा
रामगढ़ । सीमावर्ती क्षेत्र में निर्जला एकादशी पर लॉकडाउन का साया रहा। उनीस पंचायत में मंगलवार को निर्जला एकादशी पर कहीं पर भी ठंडे पानी की छबील नहीं लगी। लॉकडाउन का असर हर गांव के बाजारों और चौक पर देखा गया। दुकानदार बलवंत चौधरी (बबी), शाम चौधरी, रमन चौधरी, राजू महाजन, रिंकू चौधरी ने कहा कि इस बार निर्जला एकादशी का पर्व फीका रहा। अगर करोना महामारी न होती तो क्षेत्र में जगह-जगह छबील लगी होती। सीमावर्ती क्षेत्रों की महिलाओं ने मंदिरों में माथा ठेक भजन कीर्तन किया। संवाद
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घरों में ही एक दूसरे को पिलाया ठंडा पानी
सांबा। जिले में निर्जला एकादशी पर लोगों ने घरों में ही ठंडा मीठा पानी एक दूसरे को पिलाया। महिलाओं ने व्रत रखा। निर्जला एकादशी पर कस्बा और ग्रामीण क्षेत्रों में काफी रौनक बनी रहती थी। कोरोना महामारी के चलते सभी त्योहार पर ग्रहण लग गया है। महिलाओं ने व्रत रखा शाम को पूजा अर्चना के बाद अन्न ग्रहण किया। कस्बे के लिंक बाजार में एक दो स्थानों पर मीठे पानी की छबील लगाई गई, लेकिन पानी पीने वाले नजर नहीं आ रहे थे। कुल मिलाकर कोरोना महामारी ने सभी त्योहार चौपट कर दिए हैं। संवाद