दोमाना। मथवार के रामगढ़ गांव स्थित प्राचीन महाकाली मंदिर में छह जनवरी से 41 दिवसीय महायज्ञ जारी है। इसका समापन 18 फरवरी को होगा। शनिवार को दूसरे दिन भी सैकड़ों की तादात में श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंचकर माथा टेका। श्रद्धालुओं ने मंदिर में चल रहे महायज्ञ में आहुतियां भी डाली।
माता सुमन लता ने बताया कि वह 23 साल से इस मंदिर में पूजा अर्चना करती हैं। इसे गढ़ वाली माता के नाम से भी जाना जाता है। ये स्थान हजारों साल पुराना है। 20 साल पहले यहां मंदिर बनाया गया है। इससे पहले मां काली की मूर्ति स्थापित थी। भक्त मन्नत पूरी होने पर दरबार में माथा टेक कर आभार व्यक्त करते हैं। माता सुमन लता ने बताया कि इस महायज्ञ में 108 कलश स्थापित किए गए हैं।
इसमें 108 प्रकार की लकड़ी है। मंदिर में सुबह पांच से शाम पांच बजे तक पूजा अर्चना की जाती है। सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक पूर्णाहुति दी जाती है। मंदिर में हिंदुओं के अलावा अन्य धर्मों के लोग भी आते हैं। संकट से बचने के लिए महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए रोजाना भंडारा आयोजित किया जाता है। महायज्ञ में ओम नम: शिवाय का जप किया जाता है।
पुग्गा व्रत 10 को, माताएं संतान की लंबी आयु के लिए रखेंगी व्रत
जम्मू। हिंदू पंचांग के अनुसार संकट चतुर्थी का व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। डुग्गर प्रदेश में इसे पुग्गे के व्रत से जाना जाता है। इसके साथ ही तिल से बने मिष्ठान बनाने की प्रदेश में प्राचीन परंपरा है।
डॉ. कमलकिशोर शास्त्री ने पुग्गा व्रत के बारे में कहा कि माताएं इस व्रत को धारण कर अपने संतान की सुख-समृद्घि की कामना करती हैं। इस वर्ष के माघ माह का पहला व्रत 10 जनवरी को मनाया जाएगा। इस व्रत को बड़ी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। संकट चौथ के दिन तिल का विशेष महत्व है। इस दिन गणपति की पूजा तिल से की जाती है। इस चतुर्थी तिथि को तिलकुट चतुर्थी, लंबोदर चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।
व्रत मुहूर्त : डॉ. अनीश आचार्य के अनुसार संकट चतुर्थी का आरंभ 10 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 9 मिनट पर होगा और इसका समापन 11 को 2 बजकर 31 मिनट पर होगा। इस प्रकार इस व्रत को 10 जनवरी को मनाना ही सर्वसम्मत होगा। इस व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत को खोला जाता है। 10 जनवरी को चंद्रोदय रात 8 बजकर 41 मिनट पर होगा।
पूजन विधान: माताएं अपने घर या किसी देव स्थान में सुबह गणपति जी का पूजन कर, गणपति मंत्र का जाप, पाठ आदि कर सकती हैं। इसके साथ चंद्रोदय पर अर्घ्य देकर अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना कर गणपति जी का विधि-विधान से पूजन करें।