जम्मू। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह एवं मांगलिक कार्यों के लिए गुरु और शुक्र तारा का उदय होना एवं शुभ मुहूर्त महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष एक अक्तूबर सुबह पांच बजकर पांच मिनट पर शुक्र तारा पूर्व में अस्त होगा। इस दौरान विवाह आदि मांगलिक कार्य से बचना चाहिए। वहीं 25 नवंबर शाम पांच बजकर 21 मिनट पर शुक्र पश्चिम में उदय होगा। पंचांग के अनुसार तारा उदय होने के बाद विवाह के मुहूर्त 2, 4, 7, 8, 9 और 14 दिसंबर को हैं।
महंत रोहित शास्त्री के अनुसार गुरु और शुक्र तारा अस्त के दौरान सगाई आदि का कार्य यानी मंगनी आदि कार्य शुभ मुहूर्त में कर सकते हैं। इसमें कोई समस्या वाली बात नहीं है। तारा डूबने या चढ़ने का तात्पर्य तारा के अस्त और उदय हो जाने से होता है। जैसे सूर्य का उदय और अस्त होना। खगोल के मुताबिक सूर्य पृथ्वी के सबसे नजदीक का तारा है, जो अपने ही प्रकाश से चमकता है। अन्य ग्रह सूर्य के प्रकाश से ही प्रकाशित होते हैं। भारतीय ज्योतिष में गुरु एवं शुक्र ग्रह को तारा माना गया है।
गुरु एवं शुक्र अस्त के इन दिनों में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार, शपथ ग्रहण करना, शिलान्यास, व्रत उद्यापन, यज्ञोपवीत संस्कार आदि शुभ मांगलिक कार्य वर्जित है। इसी तरह स्वयंवर के लिए भी गुरु व शुक्र के अस्त का समय त्याज्य माना गया है। पुराने या मरम्मत किए गए मकान में गृह प्रवेश हेतु गुरु एवं शुक्र के अस्त काल का विचार नहीं किया जाता। अर्थात जीर्णोद्धार वाले मकान बनाने के लिए गुरु व शुक्र अस्त काल में प्रवेश कर सकते हैं।
यात्रा हेतु शुक्र का सामने और दाहिने होना त्याज्य है। वधू का द्विरागमन गुरु व शुक्र के अस्त काल में वर्जित है। यदि आवश्यक हो तो दीपावली के दिन ऋतुवती वधू का द्विरागमन इस काल में कर सकते हैं। राष्ट्र विप्लव, राजपीड़ावस्था, नगर प्रवेश, देव प्रतिष्ठा, एवं तीर्थयात्रा के समय नववधू को द्विरागमन के लिए शुक्र दोष नहीं लगता।