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श्रीमद्भागवत कथा में अर्जुन-कर्ण युद्ध प्रसंग का किया वर्णन

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दोमाना। मढ़ के चौहाला चक में शुक्रवार को श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान कथावाचक साहिल महाराज ने संगत को प्रभु चरणों से जोड़ा। आयोजन में शामिल लोगों ने कोविड नियमों का पालन किया।
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कथावाचक साहिल महाराज ने कहा कि यह सभी जानते हैं कि महाभारत के युद्ध में सबसे शक्तिशाली योद्धा कर्ण और अश्वत्थामा थे। कवज और कुंडल उतर जाने के बाद भी कर्ण इतने शक्तिशाली थे कि वे अर्जुन के रथ को एक ही बाण में हवा में उड़ा देते। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। दरअसल युद्ध में एक दिन कर्ण और अर्जुन आमने-सामने थे। दोनों के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था।
अर्जुन का तीर लगने पर कर्ण का रथ 25 से 30 हाथ पीछे खिसक जाता। वहीं कर्ण के तीर से अर्जुन का रथ सिर्फ 2 से 3 हाथ ही खिसकता। फिर भी भगवान कृष्ण कर्ण की प्रशंसा करते नहीं थकते थे। ऐसे में अर्जुन से रहा नहीं गया। उन्होंने पूछ ही लिया कि हे पार्थ आप मेरे शक्तिशाली प्रहारों की बजाय कर्ण के कमजोर प्रहारों की प्रशंसा कर रहे हैं।
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कृष्ण मुस्कुरा कर बोले, अर्जुन तुम्हारे रथ की रक्षा के लिए ध्वज पर स्वयं हनुमानजी, पहियों पर शेषनाग और सारथी के रूप में मैं स्वयं नारायण विराजमान हूं। इस सबके बावजूद कर्ण के प्रहार से अगर ये रथ एक हाथ भी खिसकता है, तो मानना ही पड़ेगा की कर्ण में अद्भुत पराक्रम है। ऐसे में उसकी प्रशंसा तो बनती ही है। कथा के बाद हवन कर भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया था। जोगिंदर सिंह, मंगल सिंह, प्रदीप चौहान, विशाल मन्हास आदि मौजूद थे।
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