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अतिक्रमण से घिरी है अखनूर की ऐतिहासिक धरोहर

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चिनाब दरिया के किनारे स्थिति अखनूर किला।
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अखनूर। चिनाब दरिया के जिया पोता घाट पर स्थित ऐतिहासिक किले को धरोहर के रूप में सरकार ने चिह्नित किया हुआ है, लेकिन किले के अंदर की इमारत और दीवारें खस्ताहाल में हैं। किले के रखरखाव की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग को है, लेकिन इसकी तरफ उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। किले के आसपास अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। साथ ही किले में सात सरकारी दफ्तर खुले हैं। इससे किले की सुंदरता और भी बदहाल होती जा रही है। पुरातत्व विभाग ने किले को खाली करने के लिए इन विभागों को नोटिस भेजा है, लेकिन यह प्रक्रिया नोटिस भेजने तक ही सीमित होकर रह गई है।
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इतिहास
किला 1802 में राजा आलम सिंह द्वारा बनवाया गया। किले पर काम, वास्तव में राजा तेग सिंह के कहने पर 1762 में शुरू हुआ, और 1802 में उनके बेटे राजा आलम सिंह ने पूरा किया। यह दो मंजिला किला एक चट्टान पर स्थित है। 1982 से यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन है, और इसे स्मारक अधिनियम 1958 के तहत राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है। कोनों में दो मंजिला और वॉच-टावर हैं। चिनाब नदी के किनारे से भी किले में जाने का रास्ता है। जहां से चिनाब दरिया का पानी किले में प्रवेश के लिए सुंरग बनी हुई है, जो आपातकाल के दौरान पानी में मिलती थी।
किले में कई वर्षों से सात विभाग खुले हुए हैं, जिसमें एसडीएम कार्यालय, राजस्व विभाग, खाघ आपूर्ति विभाग, कस्टोडियम कार्यालय सहित जे एंड के बैंक और पुलिस स्टेशन शामिल हैं। हालांकि पुरातत्व विभाग ने सभी विभागों को किला खाली करने का नोटिस जारी कर रखा है, मगर वह यहां से टस से मस नहीं हो रहे हैं।
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राजतिलक सेलिब्रेट कमेटी के चेयरमैन केपी सिंह ने बताया कि ऐतिहासिक धरोहर के रूप में अखनूर किले का अपना इतिहास है। इससे कई यादें जुड़ी हुई हैं। सरकार और पर्यटन विभाग को चाहिए कि किले की मरम्मत करके पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाना चाहिए। ताकि किले और अखनूर के इतिहास की जानकारी मिल सके।
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सामाजिक कार्यकर्ता रघुवीर सिंह ने बताया कि अखनूर किले में बहुत सी यादें विद्यमान हैं। जो विद्यार्थियों के लिए बहुत ही ज्ञानवर्धक हो सकती हैं। दूसरी तरफ पर्यटकों की आमद होने से यहां के लोगों को रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। किले के सौंदर्यीकरण के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। सरकार को पहल करनी चाहिए।
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स्थानीय निवासी रामलाल ने बताया कि चिनाब दरिया जिया पोता घाट पर स्थित किले के इतिहास और सौंदर्यीकरण के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं, मगर इसे जो पहचान मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पाती। देश में बहुत सही धरोहर हैं जिसे देखने प्रतिदिन हजारों पर्यटक पहुंचते हैं, ऐसे में इसे भी आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है।
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पुरातत्व विभाग की तरफ से जगह खाली करने का नोटिस आया है। हमारे कार्यालय के लिए इमारत का काम जारी है, जिसके बनने के बाद हम दफ्तर को शिफ्ट किया जाएगा। इसके अलावा पुलिस और राजस्व विभाग के कार्यालय भी बन रहे हैं।
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-अखिल सगौत्रा, एसडीएम
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