विश्व रक्तदान दिवस के मौके पर देश भर में हजारों की संख्या में लोगों ने रक्तदान किया। हालांकि जम्मू-कश्मीर में रक्तदान दिवस के मौके पर सीआरपीएफ के जवानों ने दरियादिली दिखाते हुए जो काम किया है उसकी चारों ओर सराहना हो रही है।
दरअसल किश्तवाड़ के रहने वाले अनिल सिंह की बहन ल्यूकेमिया नामक बीमारी से पीड़ित थी। इलाज के लिए उन्हें काफी मात्रा में खून की जरूरत थी। खून की तलाश में भाई अनिल ने कई जगह सर पैर मारा लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
थक हार कर उसने सीआरपीएफ के हेल्पलाइन पर फोन किया और पूरे मामले की जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगाई। जानकारी होते ही सीआरपीएफ के चार कर्मियों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल प्रभाव से रक्तदान के लिए तैयार हो गए।
लेकिन समस्या उस वक्त आकर खड़ी हो गई जब डॉक्टरों ने दो जवानों को रक्तदान करने से मना कर दिया। इसके पीछे वजह थी कि दोनों जवान रमजान के पाक महीने में रोजा थे। रक्तदान करना उनके लिए खतरे से खाली नहीं था।
डॉक्टरों ने बताया कि अगर वो रोजा तोड़ते हैं तो वह रक्तदान कर सकते हैं। जवानों ने बिना किसी देरी किए रोजा तोड़ने के लिए तैयार हो गए लेकिन रक्तदान करने का आग्रह किया।चारों जवानों की पहचान संजय पासवान, मुद्दसिर भट, असलम मीर, रामनिवास के तौर पर हुई है।
जवानों की इस दरियादाली की चारों ओर वाहवाही हो रही है। खास कर उन 2 जवानों की चर्चा जोरों पर है जिन्होंने रमजान के पाक महीने का रोजा तोड़ कर एक जरूरतमंद की मदद की। फिलहाल बच्ची का इलाज जारी है।
गौरतलब है कि इंसान इतनी तकनीकि से लैस होने के बावजूद आज तक खून को बनाने में कामयाबी नहीं हासिल कर पाया है। एक आदमी के रक्त दान से कई जिंदगी को बचाया जा सकता है।