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पाकिस्तानी ड्रोन से हथियार-ड्रग्स की खेप: अरनिया में पुलिस ने दबोचे चार तस्कर, बेरेटा पिस्तौल और हेरोइन बरामद

Wed, 07 Oct 2026 11:19 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, अरनिया

सार

अरनिया सेक्टर में पुलिस ने सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से बेरेटा पिस्तौल, कारतूस, मैगजीन, हेरोइन और अफीम बरामद हुई है, जबकि नेटवर्क के तार पंजाब से भी जुड़े मिले हैं।
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तस्करी से बरामद नशीले पदार्थों के पैकेट। - फोटो : पुलिस
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विस्तार
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जम्मू के अरनिया सेक्टर में सीमा पार से ड्रोन से हथियार और नशीले पदार्थ की तस्करी के बड़े माॅड्यूल का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने इस माॅड्यूल के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से इटली निर्मित एक बेरेटा पिस्तौल, मैगजीन, कारतूस के साथ बड़ी मात्रा में हेरोइन और अफीम बरामद की गई है। ये हेराेइन सीमा पार से गिराई गई थी। इस नेटवर्क के तार पंजाब से भी जुड़े हैं।

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पुलिस स्टेशन अरनिया की टीम ने गत तीन अक्तूबर की रात करीब 10:45 बजे तमाला पुल पर नाका लगाया था। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो युवकों को रोका गया। तलाशी में राहुल कुमार निवासी तरेबा के पास से 264 ग्राम हेरोइन, एक सिल्वर रंग की बेरेटा पिस्तौल, दो मैगजीन और चार कारतूस बरामद किए गए। दूसरे आरोपी अजय कुमार उर्फ रब्ब निवासी तलहाड़ से 276 ग्राम हेरोइन बरामद हुई।

इस संबंध में एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। दोनों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने अजय कुमार उर्फ सैम को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 464 ग्राम अफीम और 13.3 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। जांच आगे बढ़ी तो इसके तार पंजाब से जुड़े। इसके बाद पुलिस ने पंजाब निवासी जगनप्रीत रंधावा उर्फ जग्गी को भी दबोच लिया।

हैंडलर्स ने दो खेप भेजी थीं, पंजाब में होनी थी सप्लाई
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि आरोपियों को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से ड्रोन के जरिए दो खेपें मिली थीं। इसे पंजाब में सप्लाई किया जाना था। अधिकारियों का कहना है कि अरनिया, सांबा, कठुआ, अखनूर, राजोरी और पुंछ जैसे सीमावर्ती इलाके अक्सर ऐसे असामाजिक तत्वों के निशाने पर रहते हैं। इस नेटवर्क से और भी लोग जुड़े हो सकते हैं, जिनकी पहचान की जा रही है।

सुनसान इलाकों का इस्तेमाल
अरनिया सेक्टर में ड्रोन ड्रॉपिंग के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। सूत्रों के अनुसार हाल ही में चक शेरा और तरेबा गांव के बीच ऐक नाले के पास ड्रोन से नशीला पदार्थ गिराया गया था। बाढ़ में यहां का पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, आवाजाही बंद है। क्षेत्र के सुनसान होने का फायदा उठाकर तस्कर उठा रहे हैं।

बारामुला जिले में सरकारी जमीन पर बना अफजल की पत्नी का अवैध ढांचा ध्वस्त
वर्ष 2001 के संसद हमले के दोषी मोहम्मद अफजल गुरू की पत्नी की ओर सरकारी जमीन पर बनाया टीन शेड बारामुला जिला प्रशासन ने मंगलवार को जेसीबी से ढहा दिया। बारामुला के आजाद गंज स्थित गुलनार पार्क क्षेत्र में राजस्व विभाग और सुरक्षा बलों के संयुक्त दल ने बाढ़ सुरक्षा की जमीन पर बने अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया और करोड़ों की प्राइम स्टेट लैंड अपने नियंत्रण में ली। इसी कार्रवाई की जद में अफजल का परिवार भी आया। अफजल की पत्नी तबस्सुम गुरू ने मवेशियों के लिए टीन शेड बनाया था। इसके अलावा पास ही स्थित तारिक अहमद भूरू, सज्जाद अहमद भूरू और मंजूर अहमद भूरू सहित अन्य लोगों के बनाए अवैध टीन शेड तथा टीन की बाउंड्री फेंसिंग को भी हटाया गया है

अधिकारियों ने बताया कि संसद हमले में दोषी और फरवरी 2013 में फांसी दिए गए अफजल के परिवार के सदस्यों ने यह ढांचा बनाया था। यह कार्रवाई तहसीलदार बारामुला के नेतृत्व में मजिस्ट्रेट और राजस्व विभाग की देखरेख में हुई। बारामुला पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और विशेष अभियान समूह (एसओजी) के जवान तैनात रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने चेतावनी दी कि सरकारी भूमि पर इस तरह के अनधिकृत कब्जे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

अलगाववादी शब्बीर शाह की जमानत अर्जी खारिज हुई
जम्मू की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने अलगाववादी नेता शब्बीर शाह की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अभियोजन ने 30 साल पहले 1996 में श्रीनगर में अंतिम संस्कार में शामिल भीड़ के हिंसक हो जाने में उनकी भूमिका का जिक्र किया था। अदालत ने कहा कि इस स्टेज पर शब्बीर की रिहाई से ट्रायल पर असर पड़ सकता है। एनआईए मामलों के स्पेशल जज प्रेम सागर शेरगढ़ी पुलिस थाना श्रीनगर में दर्ज एफआईआर के मामले में दाखिल की गई जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। जमानत अर्जी खारिज करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत अर्जी पर फैसले के लिए थीं। केस की मेरिट पर इनका कोई असर नहीं पड़ेगा।
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मामला 17 जुलाई, 1996 को चरमपंथी हिलाल अहमद बेग की मौत के बाद निकाले गए अंतिम संस्कार जुलूस से जुड़ा है। आदेश में दर्ज अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार जुलूस जैना कदल से ईदगाह की ओर बढ़ रहा था। इसी बीच नवा क्रॉसिंग के पास भीड़ हिंसक हो गई। आरोप है कि शाह जुलूस का नेतृत्व करने वाले मुख्य लोगों में शामिल थे। वे नारे लगा रहे थे और भाषण दे रहे थे। घटना के दौरान अज्ञात हथियारबंद लोगों की ओर से पत्थरबाजी और गोलीबारी की भी सूचना थी।

याचिकाकर्ता के वकील ने मामला को तीन दशक से पुराना बताते हुए कहा कि आरोपी जांच एजेंसियों के लिए उपलब्ध रहे हैं। केवल आरोपों के आधार पर लंबे समय तक जेल में रखने को सही नहीं ठहराया जा सकता। बचाव पक्ष ने शाह की उम्र, मेडिकल स्थिति, लंबे समय तक हिरासत और दूसरे आरोपियों को जमानत मिलने का भी हवाला दिया। कहा कि शाह हिंसा में शामिल होने का कोई ठोस सबूत नहीं। जमानत अर्जी खारिज करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत अर्जी पर फैसले के लिए थीं। केस की मेरिट पर इनका कोई असर नहीं पड़ेगा। 
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