पिछले साल सितंबर के महीने में राजोरी में सेब की मिठास का हर कोई आनंद ले रहा था। यहां तक कि मुगल रोड से कश्मीर का सेब राजोरी पुंछ सहित पूरे जम्मू संभाग में जोर शोर से बिक रहा था, लेकिन इस साल सेब की महक गायब है। कारण है कि कश्मीर में बरपा कुदरत का कहर। शौपियां जिले सहित कश्मीर के अन्य जिलों में कश्मीर की फसल पर बाढ़ का कहर बरपा है।
इससे आधे से ज्यादा सेब की फसल नष्ट हो गई है। इलाके में सालभर की रोजी रोटी का जुगाड़ सेब की फसल पर निर्भर होता है, लेकिन बाढ़ ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस साल कश्मीर के शौपियां, बारामुला, आनंतनाग, कुपवाड़ा, कुलगाम,श्रीनगर, बड़गाम, जम्मू के पुंछ, राजोरी, जिले में करीब 1 लाख 43,534 हेक्टेयर क्षेत्र पर सेब की फसल लगी हुई थी।
हजरतबली, डिलिशियस, चमोरा, रजाकबारी, महाराज, अमेरिकन आदि किस्मों का सेब लगाया गया था। उम्मीद जताई जा रही थी कि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल भी 16 लाख मीट्रिक टन के करीब पैदावार होगी।
अगले महीने पककर तैयार होने वाली थी
पिछले वर्ष 16 लाख, 33 हजार 349 मीट्रिक टन पैदावार हुई थी। हजरतबली और डिलिशियस इस समय मार्केट में पहुंच जाता था। दोनों के काटने का समय सितंबर का है। जबकि अन्य किस्में भी अगले महीने पककर तैयार होने वाली थी, लेकिन बाढ़ ने पकी फसल को नुकसान कर दिया। शौपियां सेब उत्पादक एसोसिएशन के प्रधान मीर मोहम्मद अमीन का कहना है कि करीब 50 फीसदी सेब की फसल पर बाढ़ का असर पड़ा है। बाढ़ की वजह से कई बाग उजड़ गए। कई के फल जड़ गए। बहुत नुकसान हुआ है।
7 से 8 रुपये बिकता था सेब
इस समय कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से सेब मुगल रोड से राजोरी और पुंछ जिले सहित संभाग के अन्य जिलों में पहुंच जाता था। मुगल रोड के खुलने से सेब काफी सस्ता बिकता है। पिछले वर्ष 7 से 10 रुपये प्रति किलो के बीच सेब बिका। इससे हर किसी ने सेब की मिठास को चखा। इस समय मार्केट में 60 रुपये से कम कश्मीर का सेब नहीं है। यह सेब भी बाढ़ आने से पहले का आया हुआ है। जबकि हिमाचल का सेब अब मार्केट में आ रहा है।
मक्की दलहन को भी 60 प्रतिशत नुकसान
बाढ़ ने जम्मू जिले में लगी फसलों पर भी कहर बरपाया है, जिससे जिले के किसानोंकी कमर टूट गई है। उनकी मेहनत बाढ़ के पानी में बह गई है। जिला कृषि विभाग द्वारा बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट बुधवार शाम को तैयार कर सरकार तथा जिला प्रशासन को सौंप दी।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बाढ़ से साठ फीसदी धान को नुकसान हुआ है, जबकि मक्की की फसल भी साठ फीसदी बर्बाद हुई है। दलहन की पचास फीसदी नष्ट हो गई है। सब्जियों की पनीरी भी बाढ़ की चपेट में आकर तबाह हो गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू जिले में इस साल 45 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में किसानों द्वारा धान की फसल लगाई गई थी, जिसमें 4 हजार 777 हेक्टेयर में लगी धान की फसल चौपट हो चुकी है, जिसके आधार पर बताया जा रहा है कि पचास से साठ फीसदी धान की फसल में बासमती धान नष्ट हुआ है।
60 फीसदी मक्की की फसल नष्ट
गौरतलब है कि तवी नदी, चिनाब, बलोल नाला तथा खड्ड के किनारे खेतों में धान की लगाई गई फसल को भारी नुकसान हुआ है। 12 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में मक्की की फसल किसानों द्वारा लगाई गई थी, जिसमें 7000 हेक्टेयर भूमि में लगी मक्की की फसल नष्ट हो चुकी है। 60 फीसदी नुकसान बताया गया है।
3500 हेक्टेयर भूमि में दलहन फसल लगाई गई थी, जिसमें से 1100 हेक्टेयर की फसल नष्ट हुई है। यह नुकसान 50 फीसदी का बताया जा रहा है। रिपोर्ट में कु मुताबिक जिले में करीब 437 हेक्टेयर भूमि में सब्जियों की पनीरी लगाई थी, जो पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। किसानों को बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है।
जिला प्रमुख कृषि अधिकारी ओंकार सिंह चौधरी का कहना है कि धान, मक्की, दलहन तथा सब्जियों की पनीरी के नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर सरकार तथा जिला प्रशासन को सौंपा गया है।