जिला के घगवाल तहसील के गांव छन्न मलागरां में स्थित एक तालाब में वीरवार को मगरमच्छ देखे जाने से हड़कंप मच गया। मगरमच्छ मिलने की सूचना से प्रशासन भी सतर्क हो गया। रियासत में आज तक कभी मगरमच्छ नहीं देखा गया। इसलिए यहां वन्यजीव विभाग के पास मगरमच्छ पकड़ने के लिए कोई साधन नहीं और न ही इसे काबू करने के लिए विशेषज्ञ की हैं।
इसके लिए देहरादून और चंबल में विभाग से संपर्क किया गया है। जब तक टीम नहीं आती है, तब तक सांबा के एसएसपी और डीसी से कहा गया है कि अगले पांच दिनों तक तालाब के आसपास किसी को न आने दिया जाए। 16 अगस्त को विशेषज्ञों की टीम के पहुंचने की संभावना है।
वीरवार को जिला पुलिस प्रमुख एसएसपी जोगिंद्र सिंह ने भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को तालाब की ओर नहीं जाने के लिए कहा। गांव में स्थित तालाब के निकट एक फैक्ट्री में काम करने वाले मुन्ना ने बताया कि वह पिछले मंगलवार को तालाब के निकट बनी एक पानी की टंकी से पानी लेने गया था। तभी उसकी निगाह तालाब के किनारे मगरमच्छ पर पड़ी।
वाइल्ड लाइफ विभाग की टीम ने जमाया डेरा
मगरमच्छ को पकड़ने के लिए लाया गया जाल
- फोटो : Amar Ujala
इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। गांव छन्न मलाग्रां के वीडीसी के सदस्य तीरथराम, धर्मपाल, रामदास, राजेश कुमार आदि ने बताया कि उन्होंने सुबह तालाब के किनारे मगरमच्छ को देखा था। उनका कहना था कि तालाब के निकट ही एक नहर है।
पिछले दिनों भारी बारिश के कारण नहर में पानी काफी अधिक हो गया था। इस नहर में उज्ज दरिया से पानी आता है। उन्हें अंदेशा है कि नहर के रास्ते मगरमच्छ तालाब में आ गया होगा। वीरवार को पूरे दिन तालाब के किनारे मगरमच्छ को देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।
वाइल्ड लाइफ विभाग के रेंज अधिकारी अमित शर्मा ने बताया कि सूचना मिलने के बाद वे पिछले बुधवार को ही गांव पहुंच गए थे। वीरवार की सुबह उन्होंने मगरमच्छ को तालाब के बीच में देखा। उसकी फोटो लेकर उन्होंने देहरादून में अधिकारियों को भेजी। वहां से तालाब में मगरमच्छ होने की पुष्टि की गई है। चंबल से एक टीम मगरमच्छ पकड़ने के लिए आएगी। उनका कहना था कि जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में मगरमच्छ के होने की आज तक उन्हें जानकारी नहीं है। इसलिए यह मगरमच्छ कहां से आया इस बारे में अभी ठोस ढंग से कुछ नहीं कहा जा सकता है। इस अवसर पर विभाग के ब्लाक अधिकारी जाकिर हुसैन भी मौजूद थे।