किश्तवाड़ की प्रिंसिपल सेशन जज बाला ज्योति ने दहेज के लिए आत्महत्या करने के लिए उकसाने के मामले में आरोपी पति और ससुर को दस हजार रुपये जुर्माने सहित दस साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। किश्तवाड़ स्थित पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले के मुताबिक 2008 में किश्तवाड़ की सुषमा ने अपने घरवालों की मर्जी के खिलाफ जिले के गड़ सरूर के रहने वाले रोशन लाल के बेटे मूल राज के साथ विवाह किया था।
सुषमा ने अपने घरवालों की गैर मौजूदगी में युवक के घर में ही हिंदू रीति-रिवाज के साथ विवाह किया। इसके बाद 2009 में सात अप्रैल को सुषमा अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। तब चंद्रप्रभा नाम की महिला ने मृतका के मायके में फोन कर उसके माता-पिता को मौत की सूचना दी। मृतका के माता-पिता अपनी बेटी के सुसराल पहुंचे तो उसके घरवालों ने जानकारी दी कि उसकी मौत पेट दर्द के कारण हुई है।
इस दौरान मृतका की मां ने अपनी बेटी के गले में निशान देखे तो उसने पुलिस स्टेशन में ससुराल वालों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करवाया था। पुलिस की छानबीन और पूरी कानूनी कार्रवाई के बाद प्रिंसिपल सेशन जज ज्योति बाला ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करते हुए 498-ए आरपीसी धारा के तहत पांच हजार रुपये तक के जुर्माने सहित तीन वर्ष और 306 आरपीसी धारा के तहत पांच हजार रुपये जुर्माने सहित सात वर्ष की कैद सुनाई।
इस मौके पर जज ने कहा है कि अगर दोनो आरोपी समय पर जुर्माना देने से देरी करते हैं तो उन्हें छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
जेएनएफ