पिछले रविवार को जंगली खुंभ (मशरूम) का जायका एक किसान परिवार के लिए जानलेवा साबित हुआ। खुंभ की सब्जी जहरीली निकली। पहले बेटे ने दम तोड़ दिया। दो दिन बाद चार अन्य सदस्यों की हालत बिगड़ी, तो उन्हें जीएमसी जम्मू शिफ्ट कर दिया गया।
उपचार में देरी की वजह से शुक्रवार की सुबह चार वर्षीय बेटी अनु और दोपहर बाद मां अंचला ने भी दम तोड़ दिया। नौ वर्षीय काजल और उसका पिता रतनचंद जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं।
विषाक्त भोजने खाने का यह मामला रविवार दो अगस्त का है। जिले की बनी तहसील के मोठली गांव में रतनचंद का परिवार मंगियार में भंडारे से प्रसाद ग्रहण कर घर लौटा था। लौटते समय उन्होंने जंगल से जंगली खुंभ एकत्रित की थी।
घर पहुंचने पर पूरे परिवार के लिए बड़े ही शौक से खुंभ बनाई गई। रतन और अंचला के पांच बच्चों में से 15 वर्षीय प्रोमिला और 11 वर्षीय विक्की ने नींद आने की बात कही और बिना खुंभ की सब्जी खाए सो गए।
बाकी तीन बच्चों सहित दंपति ने चाव से खुंभ के साथ भोजन किया। रात करीब नौ बजे रतनचंद के सात साल के बेटे गणेश की हालत बिगड़ गई। आननफानन में उन्होंने गणेश को बसोहली उपजिला अस्पताल लेकर भागे, लेकिन गणेश को बचाया नहीं जा सका।
बच्चे के अंतिम संस्कार से घर आने तक बाकी सदस्यों की हालत ठीक थी। सोमवार को उनकी हालत खराब होनी शुरू हो गई। जब तबीयत ज्यादा खराब होने लगी, तो रतनचंद, उनकी पत्नी अंचला, बेटी अनु और काजल को जीएमसी जम्मू पहुंचाया गया।
बच्चों को शालामार स्थित अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जबकि दंपति को जीएमसी शिफ्ट कर दिया गया। उपचार के दौरान शुक्रवार की सुबह चार साल की बेटी अनु ने दम तोड़ दिया।
त्रासद माहौल के बीच अनु की मां अंचला ने दोपहर करीब सवा तीन बजे आखिरी सांस ली। पीड़ित परिवार के रिश्तेदार तिलक राज ने बताया कि दूसरी बेटी काजल की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जबकि पिता रतनचंद का पेट बुरी तरह संक्रमित बताया गया है।