चुनाव के दौरान डीएसपी को हमला कर घायल करने के आरोप में फंसे पूर्व सहकारिता राज्यमंत्री मनोहर लाल की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी है। प्रिंसिपल सेशन जज विनोद चटर्जी कौल की अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया।
पुलिस केस के मुताबिक 20 दिसंबर 2014 को डीएसपी (डार) कुलजीत सिंह और कांस्टेबल मस्त राम ने बिलावर थाने में मौखिक रिपोर्ट की कि वह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मांडली इलाके में रात लगभग एक बजे पेट्रोलिंग कर रहे थे।
उन्हें सूचना मिली कि कोहग में 60-70 कांग्रेस वर्कर चुनाव प्रचार कर रहे हैं, जिसका अन्य राजनीतिक दलों ने विरोध किया। इसी दौरान मनोहर लाल, अजीत कुमार, रोमी सहित 80-90 कार्यकर्ता वाहनों में पहुंचे और उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
इससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। कांग्रेसी के वर्करों ने पुलिस पर पथराव भी किया। इसमें कांस्टेबल मस्त राम को चोट आई। राज्यमंत्री और पार्टी वर्करों ने माडल कोड आफ कंडक्ट का भी उल्लंघन किया।
पुलिस ने मंत्री व अन्य के खिलाफ आरपीसी की धारा 307, 353, 336, 323, 147, 148 के तहत मामला दर्ज किया। साथ ही चश्मदीद गवाहों के सीआरपीसी की धारा 164-ए के तहत बयान लिए गए। उसके बाद से ही राज्यमंत्री फरार हैं।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार राज्यमंत्री सहित फरार 11 नामजद लोगों की पुलिस पूछताछ के लिए जरूरत है। जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए प्रिंसिपल सेशन जज कठुआ विनोद चटर्जी कौल ने पाया कि प्रथम दृष्टया में स्पष्ट हो रहा है कि आरोपी ने हमला किया है।
आरोप काफी गंभीर हैं और यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो समाज में गलत संदेश जाएगा। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए जमानत अर्जी को अदालत ने खारिज कर दिया।
जेएनएफ