राज्य सतर्कता आयोग ने मलंगपोरा पुलवामा वाटर सप्लाई स्कीम में घोटाले का पदार्फाश किया है। आयोग ने पीएचई विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी को हिदायत दी है कि वह मलंगपोरा तथा जंगलनार वाटर सप्लाई स्कीम के तहत फंड के दुरुपयोग की नियमित रूप से जांच करें। आयोग ने यह हिदायत पीएचई अवंतीपोरा के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर तथा एक्जीक्यूटिव इंजीनियर मैकेनिकल डिवीजन के खिलाफ मिली शिकायतों में दी।
शिकायत थी कि जंगलनार एवं मलंगपोरा वाटर सप्लाई स्कीम 2003-04 एवं 2007-08 में स्वीकृत हुई। इससे नौ गांवों को पानी की सप्लाई की जानी थी। प्रोजेक्ट के नाम पर करोड़ों रुपये निकाले गए, लेकिन धरातल पर कोई भी काम नहीं हुआ। विभाग के रिकार्ड के अनुसार जमीन में पाइप डाली गई है, लेकिन मौके पर पाइप नहीं मिला।
शिकायतों के आधार पर आयोग ने जिला सतर्कता अधिकारी को मौके पर जाकर जांच करने को कहा था। सतर्कता अधिकारी की ओर से रिपोर्ट दी गई कि मलंगपोरा स्कीम को 2014-15 में पूरा दिखाया गया जबकि वह अब भी क्रियाशील नहीं है।
जंगलनार स्कीम को भी योजनाबद्ध तरीके से नहीं किए जाने से वह सफल नहीं हो पाई। इससे सरकारी धनराशि की क्षति हुई। आयोग ने अधिकारियों के इस गैर जिम्मेदाराना रवैये को गंभीरता से लेते हुए लगातार पीएचई डिवीजन अवंतीपोरा में तैनात अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए। इसके साथ ही आडिट कराने और योजना की अधिकारियों की टीम से जांच कराने को कहा।