बहुचर्चित जगती विस्थापित हत्याकांड में सोमवार को जम्मू के प्रिंसिपल सेशन जज आरएस जैन की अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। अभियोजन केस के अनुसार आरोपी सुनील सिंह, नरेश शर्मा, गौरव प्रताप सिंह, झंकार सिंह और उत्तम सिंह के खिलाफ चार अगस्त 2013 को नगरोटा थाने में अंकुश तलाशी ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के अनुसार उस दिन अकुंश अपने पिता तेज नाथ तलाशी और चाचा प्यारे लाल तलाशी के साथ शाम की सैर को निकला था।
लगभग सात बजे जब वे पैदल फ्लाईओवर जगती की ओर जा रहे थे तो उसी समय फ्लाईओवर के करीब एक वाहन (जेएमयू 7778) आकर रुका। उसमें सवार सुनील सिंह, नरेश शर्मा और गौर प्रताप सिंह को वह पहचानता है। अन्य लोगों से उनकी पहचान नहीं थी। सभी लोग वाहन से उतरे और पुरानी रंजिश में उसे जबरन वाहन में घुसाने का प्रयास किया। जब उनके पिता ने शोर मचाया और उसे बचाने का प्रयास किया तो हमलावरों ने उसके पिता को पकड़ लिया। हमलावरों में से एक सुनील सिंह ने घातक हथियार से उनके पिता पर जानलेवा हमला कर दिया।
इससे उनके पिता गंभीर रूप से जख्मी हो गए। उन्हें तत्काल जीएमसी अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने अंकुश की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ आरपीसी की धारा 307 का केस दर्ज किया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ लगे केस की धारा 302 में परिवर्तित कर दी गई। प्रिंसिपल सेशन जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि अदालत में पेश किए गए सबूत में आरोपियों के खिलाफ गहरा संदेह पैदा कर रहा है।
जिसे सही तरीके से समझाया नहीं गया है। प्रारंभिक स्तर पर सुनील सिंह, नरेश शर्मा और गौरव प्रताप सिंह के खिलाफ 302 का केस दर्ज किया गया, जबकि झंकार सिंह और उत्तम सिंह पर आरोप है कि वारदात के बाद उन्होंने तीनों को उसी वाहन में सुजानपुर (पंजाब) के रास्ते भागने में मदद की। दोनों के खिलाफ आरपीसी की धारा 212 के तहत मामला दर्ज किया गया। जेएनएफ