स्किल डेवलपमेंट के नाम पर रियासत के युवाओं से लाखों रुपये ऐंठने का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि स्किल की ट्रेनिंग देने की बजाय युवाओं को इंश्योरेंस करवाया गया और रुपये जमा ले लिए। इतना ही नहीं, आवेदन करने वाले लगभग 400 युवाओं से 3950 रुपये प्रत्येक लिए गए, जिन्हें छह माह की ट्रेनिंग के बाद लौटाया जाना था, लेकिन छह माह पूरे होने से पहले ही संचालकों ने कार्यालय बंद कर दिया।
इस मामले में प्रशिक्षण पाने वाले युवाओं ने क्राइम ब्रांच में एक शिकायत दर्ज करवाई है। एसएचओ गांधी नगर परमजीत सिंह ने कहा कि संस्थान के युवा सोमवार को थाने आए थे, लेकिन उनका आवेदन क्राइम ब्रांच में है, इसलिए फिलहाल कोई केस दर्ज नहीं किया गया है। क्राइम ब्रांच की जांच के बाद ही इस पर अगली कार्रवाई की जाएगी।
युवाओं ने पुलिस को बताया कि गांधी नगर इलाके में भारत स्किल डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन के नाम से एक कार्यालय खुला। स्थानीय समाचार पत्र में एक विज्ञापन आया था, जिसमें युवाओं को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार मुहैया करवाने का वादा किया गया।
'हमारे यहां ऐसी कोई पालिसी नहीं है'
इसके लिए उन्होंने 3950 रुपये प्रत्येक आवेदक शुल्क लिया, जो छह माह के बाद वापस किया जाना था। इसके बाद उन्हें शहर के एक होटल में एक दिन प्रशिक्षण दिया गया और उनसे इंश्योरेंस करवाने के अलावा पेपर प्लेट बनाने की मशीन की बुकिंग करवाई गई। ओरिएंटल इंश्योरेंस की यूनिवर्सल हेल्थ बीमा के नाम पर करवाई गई पालिसी की प्रीमियम राशि भी संस्थान ने जमा ले ली।
मई माह के आरंभ में अचानक कार्यालय बंद कर दिया गया। तब से संचालकों का कोई अता-पता नहीं है। युवाओं को प्रत्येक माह छह हजार रुपये स्टाइपंड देने का वादा किया गया था, लेकिन वह भी नहीं दिया गया। युवाओं के अनुसार जब उन्होंने ओरिएंटल इंश्योरेंस के कार्यालय में जाकर पूछताछ की तो उन्होंने ऐसी कोई पालिसी उनके यहां से होने की बात से इंकार किया।
इसके बाद स्थानीय स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर नरिंदर सिंह (निवासी नौशेरा) ने क्राइम ब्रांच में अपने ही संस्थान के अधिकारी सुशांत दत्ता व अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई।
पसोपेश में स्टाफ, नहीं मिला वेतन
गांधी नगर कार्यालय में काम करने वाली युवतियां भी पसोपेश में हैं। उनका कहना है कि पिछले दो माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। कार्यालय में काम करने वाली स्वरलीन कौर और शैली ने कहा कि उन्हें निर्देश दिए गए कि स्टेट डायरेक्टर का स्थानांतरण हो गया है और जब तक नया डायरेक्टर नहीं आता, कार्यालय बंद रखा जाए।
खास बात यह है कि कार्यालय में काम करने वाली युवतियों के मोबाइल सिम भी उनकी पहचान पर ही खरीदे गए, ताकि बाद में संचालकों को किसी प्रकार की समस्या न हो। प्रशिक्षण पाने वाली युवती पूनम देवी ने बताया कि उन्हें तीन माह तक 6-6 हजार और बाद में साढ़े नौ हजार प्रत्येक माह देने की बात कही गई थी।
छह माह पूरे होने पर उनके द्वारा जमा की गई 3950 रुपये की राशि लौटाई जानी थी। पूनम के अनुसार उसने बहुत मुश्किल से छह केस किए थे, जिनकी राशि कार्यालय में जमा करवाई। अब लोग उनके पास आ रहे हैं।