अपने से बिछड़ों को बरसों बाद देखने पर जहां आंखें पसीज जाती हैं, वहीं एक पिता का शव लेने से बच्चों ने ही इनकार कर दिया। वह बीस वर्ष से अपनों से अलग रह रहा था। इसके बाद उसके मकान मालिक ने जोगी गेट संस्कार समिति के सहयोग से अंतिम संस्कार कराया है।
मूलरूप से जालंधर एवं मौजूदा प्रीत नगर डिगियाना निवासी सुशील कुमार (58) अपने निवास पर 26 अप्रैल को अचेत अवस्था में मिले थे। पड़ोस के लोगों ने उन्हें जीएमसी पहुंचाया था, जहां डाक्टरों ने मृत लाया घोषित कर दिया था।
जीएमसी चौकी से गांधीनगर पुलिस को संदेश मिला तो जांच शुरू की गई। पता चला कि हृदयगति रुकने से मौत हुई है। सुशील की प्रीत नगर डिगियाना में इलेक्ट्रानिक की दुकान थी और किराये के मकान में रह रहे थे।
पुलिस के मुताबिक सुशील कुमार की पत्नी, बेटा और बेटी जालंधर छोड़कर पठानकोट में रह रहे थे। वीरवार को सुशील कुमार के शव का पोस्टमार्टम करवाने से पहले परिवार से संपर्क किया गया तो उन्होंने शव लेने के लिए आने से इनकार कर दिया।
कहा कि 20 साल से उनके पिता ने उनकी कभी खबर नहीं ली कि वे जिंदा हैं या नहीं, कैसे रह रहे हैं, कैसे नहीं। इसलिए वे शव लेने नहीं आ सकते। इसके बाद पुलिस ने सुशील के मकान मालिक को बुलवाकर शव का पोस्टमार्टम करवाया। पुलिस संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की भी जांच कर रही है।