सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों के बाद जम्मू पुलिस ने शहर में अलग-अलग थाना क्षेत्र के तहत चार दर्जन किशोरों के अपहरण होने के मामले दर्ज किए हैं। ऐसा पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को अमल में लाते हुए किया है। अठारह साल से कम उम्र के बच्चों और किशोरों की अब लापता रिपोर्ट नहीं, बल्कि सीधा उनके अपहरण का पर्चा लगेगा।
अठारह साल से अधिक आयु के भी लापता होने वालों की लिस्ट कम लंबी नहीं है। पुलिस का दावा है कि लापता लोगों की जांच जारी है। जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने हिदायतें दी हैं कि अठारह साल से कम उम्र के किशोरों और बच्चों के लापता होने के मामले में पुलिस अपहरण का पर्चा लगाएगी।
अब से पहले तक पुलिस लापता की रिपोर्ट डालती है, जिस पर अच्छे से काम हुआ या नहीं हुआ, पर पुलिस की कोई जवाबदेही नहीं रहती थी। उधर अभिभावक लापता होने वाले अपने अपने दिल टुकड़ों को ढूंढ निकालने के लिए पुलिस थानों के चक्कर काटते रहते थे, बावजूद उनके लाडलों का पता नहीं चलता था।
नहीं मिल पाते अधिकतर लापता बच्चे
सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों के बाद किशोरों को ढूंढने के मामले में पुलिस अपनी जांच-पड़ताल जारी रखे तथा कायदे से उन सभी सूत्रों का इस्तेमाल करे, जिनके माध्यम से लापता बच्चों को ढूंढा जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि बच्चे अपने अच्छे-बुरे का फैसला करने के योग्य नहीं होते हैं।
फिर उनका अचानक से लापता हो जाना, इस मामले को संदिग्ध कहना उचित होगा। जांच में कई बच्चे मिल जाते तो अधिकतर नहीं। ऐसे में किशोरों और बच्चों की तलाश के लिए पुलिस ठोस कदम उठाते हुए धारा 363 के तरह अपहरण का पर्चा लगाने के निर्देश हैं। जिसके पुलिस अमल में ला रही है।
जम्मू के थानों में 2008 से लेकर अब तक चार दर्जन किशोरों के लापता होने के मामले में सामने आए हैं। इनमें से मेल और फीमेल दोनों है। जबकि जानीपुर, गंग्याल, सतवारी और दोमाना में खाका तैयार किया जा रहा है तो झज्झर कोटली और नगरोटा में अठारह से कम उम्र के लापता होने का मामला ही नहीं है।
थाने लापता
नवाबाद 10
त्रिकुटानगर 8
गांधीनगर 6
छन्नी हिम्मत 5
सिटी थाना 4
बस स्टैंड 4
बागे बाहु 0
बख्शीनगर 2
पीर मिट्टा 2
पक्का डंगा 2