रविवार सुबह छह बजे से विशांत को ढूंढ़ने में जुटे नाइन पैरा के गोताखोरों और एसडीआरएफ ने आखिरकार शाम चार बजे यानी डूबने के 25 घंटों के बाद शव को तलाश कर लिया। विशांत का शव डूबने वाली जगह से 150 मीटर दूर सैनिक स्कूल के पीछे तवी नदी के अंदर से निकाला गया। विशांत के माता-पिता, रिश्तेदार और गली मोहल्ले के लोग बड़ी तादाद में घटनास्थल पर मौजूद थे।
गौरतलब है कि शनिवार दोपहर को विशांत और दिनेश तवी नदी में नहाते वक्त डूब गए थे। दिनेश का शव शनिवार रात को ही 9.30 बजे बरामद हो गया था, लेकिन विशांत का कोई पता नहीं चला था। रविवार सुबह छह बजे से गोताखोरों की टीम विशांत को ढूंढ़ने में जुटी थी। बार-बार गोताखोर पानी में डुबकी लगाते और ऊपर आते। इस तरह सैकड़ों बार प्रयास करने के बाद जाकर बमुश्किल विशांत का शव तवी नदी में से ढूंढ़ निकाला गया।
विशांत दसवीं कक्षा का छात्र था। माता-पिता, भाई बहन का रो-रोकर बुरा हाल था। दिनभर लोग तवी नदी में आंखें गड़ाए बैठे हुए थे। गोताखोर अपने काम में लगे थे, लेकिन माता-पिता इस बात को एक अनहोनी की तरह गुजर जाने की भगवान के आगे प्रार्थना कर रहे थे, लेकिन शायद उनकी यह दुआ कबूल नहीं हो सकी। विशांत का शव बाहर आते ही माता-पिता उसकी और भागे और सीने से लगाकर जोर जोर से चिल्लाने लगे।
विशांत के पिता दीपक कुमार आर्मी के आयुध भंडार डिपो में कैजुअल लेबर तैनात हैं। नगरोटा के एसएचओ ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जीएमसी के शवगृह में भेज दिया है। इसके साथ ही मामला दर्ज करके जांच भी शुरू कर दी है।