नगरोटा के लापता सरपंच एवं एडवोकेट रमण वजीर का तीसरे दिन भी कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस ने मान लिया है कि रमण वजीर को अगवा किया गया है। किसी जमीन के विवाद और बन टोल प्लाजा में ठेके को लेकर विवाद पर पुलिस की जांच टिकी हुई है।
वकीलोें ने भी कोर्ट मेें चौथे दिन कामकाज ठप रखा और वकील की तलाश मेें पुलिस को तेजी से काम करने की मांग की। पुलिस लखनपुर से श्रीनगर और मुगल रोड तक हाईवे के सभी सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है।
कोर्ट द्वारा तैयार की गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (सिट) ने काम करना शुरू कर दिया है, जबकि खुद एसएसपी सुनील गुप्ता ने भी नगरोटा पहुंच कर मामले की जांच की। लापता वकील के परिवार की तरफ से कुछ नए नाम बताए गए हैं। जिन पर उन्हें किडनैप करने का शक है।
जमीन और बन टोल प्लाजा के ठेके को लेकर विवाद पर टिकी जांच
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पुलिस ने इन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है, जबकि इससे पहले भी कई लोगों को हिरासत में लिया हुआ है। परिवार की ओर से बताया गया कि बन टोल प्लाजा के ठेकेदारों से भी वकील का विवाद था, जबकि कुछ लोगों से जमीन का विवाद था। दोनों गुटों के पुलिस ने कई लोग हिरासत में लिए हुए हैं।
एसएसपी जम्मू सुनील गुप्ता का कहना है कि पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। दो मुख्य पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इससे एडवोकेट का पता चल सकता है। एडवोकेट को अंतिम बार मिलने और दिखने वाले लोगों का भी पता चला है, उनसे भी पूछताछ की गई है। संपन्न परिवार से संबंध रखने के बाद भी रमण वजीर के लापता होने का केस पुलिस के लिए उलझता जा रहा है।
पुलिस घरेलू विवाद की थ्योरी पर भी काम कर रही है। कोर्ट ने एसपी साउथ शहजाद सलारिया के नेतृत्व में टीम का गठन किया है। क्राइम ब्रांच से इंस्पेक्टर परवेज को भी रिलीव कर दिया गया। देर शाम पूरी टीम ने बैठक करके केस को सुलझाने के पहलुओं पर चर्चा की। मौके पर जाकर निरीक्षण किया। घर के सीसीटीवी कैमरे से भी पुलिस कोई ठोस सुराग नहीं जुटा पाई।