जम्मू।सुंजवां इलाका पहले से ही रोहिंग्याओं की बस्ती के लिए जाना जाता रहा है। कैंप में फिदायीन हमले के तार रोहिंग्याओं से जुड़ रहे हैं। सूत्रों की मानेें तो कैंप में फिदायीन दस्ते को दाखिल कराने में रोहिंग्याओं का हाथ हो सकता है। सुंजवां सैन्य कैंप के पीछे और एक किलोमीटर पहले तकरीबन तीन सौ झुग्गियां रोहिंग्याओं की है।
तीन प्रमुख झुग्गियों में किरयानी तालाब, कासिम नगर और छन्नी रामा की रोहिंग्या बस्ती प्रमुख रूप से है। इन तीनों बस्तियों में 80-80 झुग्गियां हैं। बाकी रोहिंग्या तितर-बितर होकर अन्य इलाकों में रहते हैं। पहले भी सुरक्षा एजेंसियों की ओर से दावे किए जाते रहे हैं, कि रोहिंग्या आतंकी गतिविधि में शामिल हैं। हालांकि इनके ऊपर नशा तस्करी, अवैध रूप से रोहिंग्याओं को रियासत में लाना और पशुवध जैसे आपराधिक मामले त्रिकुटा नगर और छन्नी थाने में दर्ज हैं। इन मामलों के बाद बीएसएफ और सुरक्षा एजेंसी इन पर नजर बनाए हुए हैं। अब सवाल उठता है कि आखिर कैंप की पुख्ता जानकारी फिदायीन दस्ते को कैसे हुई? क्या हमले से पहले कैंप की पूरी रेकी की गई थी?
सूत्रों के मुताबिक आसपास के लोगों से रोहिंग्याओं को पूरे कैंप की पूरी जानकारी थी। किस हिस्से में कौन सी चीजें हैं, कौन से क्वार्टर किस जगह पर स्थित है। इन्हीं जानकारी के आधार पर फिदायीन दस्ता कैंप में दाखिल हुआ होगा। फिलहाल 40 घंटे से सुंजवां सेना के कैंप में आपरेशन जारी है। मामले की जांच एनआईए को सौंपी जा चुकी है। ऐसे में संदिग्ध रोहिंग्याओं से पहले ही सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ शुरू कर चुकी है। गौरतलब है कि कैंप के सामने ही बीते सितंबर में ही रोहिंग्याओं को लेकर भारी बवाल हुआ था। उसके बाद उनके आतंकियों से मिले होने की बात स्थानीय लोगों द्वारा कही जा रही थी।