जम्मू। दक्षिण कश्मीर के साथ लगते किश्तवाड़ में आतंक ने पैर पसार लिए हैं। आतंकी बीते छह महीने में तीन बड़ी आतंकी वारदातों को किश्तवाड़ में अंजाम दे चुके हैं, लेकिन तीनों ही वारदातों में शामिल आतंकियों तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पाए। अभी एक मामले की जांच पूरी नहीं होती कि आतंकी नई वारदात को अंजाम दे जाते हैं।
एक नवंबर 2018 को आतंकियों ने किश्तवाड़ के बड़े भाजपा नेता अनिल परिहार और उनके भाई की गोली मारकर हत्या कर दी। 5 नवंबर को राज्यपाल ने यह घोषणा भी कर दी कि पुलिस ने हमला करने वाले आतंकियों की पहचान कर ली है। इसके बाद हमले से जुड़े कुछ लोगों को पकड़ा भी गया, लेकिन मुख्य आरोप कौन है, इसका अब तक पता भी नहीं चला है। एक महीने तक पुलिस इस मामले में हवा में तीर मारती रही। बाद में जांच एनआईए को सौंप दी गई।
इसके बाद इसी साल 9 मार्च को आतंकियों ने जिला उपायुक्त अंग्रेज सिंह राणा के पीएसओ आबिद हुसैन से राइफल छीन ली। इस बारे में भी पुलिस को अब तक कोई सुराग हाथ नहीं लगा। पुलिस ने वारदात को अंजाम देने वालों की पहचान करने का दावा तो किया है, लेकिन किसी को पकड़ा नहीं गया। इसी महीने 9 अप्रैल को आतंकियों ने दिनदहाड़े संघ नेता चंद्रकांत शर्मा और उनके पीएसओ की जिला अस्पताल में हत्या कर दी। पुलिस का दावा है कि इस हमले को अंजाम देने के पीछे किश्तवाड़ के स्थानीय आतंकी जाहिद अहमद का हाथ है, लेकिन पुलिस इसे भी पकड़ नहीं पाई।
भाग जाते हैं दक्षिण कश्मीर
सूत्रों का कहना है कि आतंकी वारदात को अंजाम देने के बाद दक्षिण कश्मीर भाग जाते हैं। यहां से उनको पकड़ पाना मुश्किल साबित हो जाता है।
किश्तवाड़ में सक्रिय आतंकियों का बड़ा नेटवर्क
किश्तवाड़ में आतंकवाद के दोबारा पैर पसार लेने के पीछे पुलिस की लापरवाही और कमजोर खुफिया नेटवर्क भी एक बड़ा कारण है। सूत्रों की मानें तो किश्तवाड़ में करीब एक दर्जन आतंकी सक्रिय हैं। इनके साथ बड़ी संख्या में ओवरग्राउंड वर्कर भी जुड़ चुके हैं। जो आने वाले दिनों में ऐसे ही कुछ और हमलों को अंजाम दे सकते हैं। किश्तवाड़ में इन तीन वारदातों ने लोगों के बीच डर पैदा कर दिया है।
हमलों पर अमर उजाला के सवाल, आईजी जम्मू एम के सिन्हा के जवाब
रिपोर्टर: तीन हमले हो गए। तीनों के आरोपियों की पहचान हुई, पकड़ा कोई नहीं?
आईजी: किसने कहा कि पहचान हो पाई है। अभी शक ही है। वैसे भी पहले हमले की जांच एनआईए कर रही है। यह तो वहीं बता सकते हैं। रही बात दूसरी घटना की, तो उसमें एक व्यक्ति पर शक है, लेकिन वो पकड़ा नहीं गया है। हाल ही की घटना के बारे में कहूं तो उसमें भी कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं, जिसमें हारून, जाहिद हैं, लेकिन अभी तक कोई पकड़ा नहीं गया है। जब तक कोई पकड़ा नहीं जाता, तो क्या कह सकते हैं।
रिपोर्टर: क्या मान लें कि किश्तवाड़ में आतंकवाद दोबारा जिंदा हो गया है?
आईजी: हां, आतंकियों का नेटवर्क तो बढ़ा है, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि आतंकवाद दोबारा जिंदा हो गया है। किश्तवाड़ में आतंकवाद कभी खत्म हुआ ही नहीं था। पहले दो आतंकी थे, अब सात हो गए हैं। आतंकियों का नेटवर्क बढ़ा है, जिसको ध्वस्त करने के लिए हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। इस नेटवर्क को बढ़ने देना और इस पर काबू पाना इतना आसान भी नहीं है, लेकिन हम अपने स्तर पर बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं।
रिपोर्टर: किश्तवाड़ के लोग सुरक्षित नहीं, उनमें डर पैदा हो गया है?
आईजी: ऐसा कुछ नहीं। पुलिस हर स्तर पर काम कर रही है। हमने पूरे जिले में नाके बढ़ाए हैं, गश्त बढ़ाई है। अपना नेटवर्क मजबूत किया है। लोगों को डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।