गेहूं की फसल काटकर किसान अपने घर ले जाने के बाद खेतों में आग लगा दे रहे हैं। ताकि बचा हुआ घास फूस (सरकंडों) को साफ कर दिया जाए। लेकिन इस आग से खेतों को जबरदस्त नुकसान हो रहा है। कृषि विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि किसानों के ऐसा करने से खेतों से महत्वपूर्ण जीवाणु खत्म हो रहे हैं। खेतों की उर्वरक क्षमता कम हो रही है, जिसका अगली फसल पर असर पड़ सकता है।
दरअसल, किसानों की ओर से मशीनों के जरिये फसल की कटाई की जा रही है। फसल कटने के बाद करीब एक फुट तक का सरकंडा बच जाता है। जिसको साफ करने के लिए खेत में आग लगा दी जा रही है। इससे खेतों की जमीन पर असर पड़ रहा है और तापमान भी बढ़ रहा है।
शेर ए कश्मीर कृषि एवं तकनीकी विज्ञान विश्वविद्यालय के रिसर्च विभाग के निदेशक जे पी शर्मा ने कहा कि खेतों के भीतर छोटे छोटे जीवाणु होते हैं। यह खेतों में नमी बनाए रखने में अहम होते हैं। खेतों को उपजाऊ बनाने में इनका अहम रोल रहता है। लेकिन आग लगने से यह खत्म हो जाते हैं। पहले से ही जब तेज धूप हो तो जमीन सूखी हुई होती है, लेकिन जब रात को इसमें आग लगा दी जाए तो काफी देर तक तपती रहती है। इससे जीवाणु खत्म हो जाते हैं। खेतों की उर्वरक क्षमता कम हो जाती है।