जम्मू।सुंजवां फिदायीन हमले में शहीद जवान मंजूर अहमद की बीवी और दोनों बच्चियों को इस इल्म नहीं कि उनका रखवाला अब दुनिया में नहीं रहा। चालीस घंटे से जारी आपरेशन के बीच अभी भी शहीद जवान का परिवार कैंप के भीतर क्वार्टरों में फंसा है। जीएमसी में पोस्टमार्टम के लिए जवान का शव लेकर उनके भाई पहुंचे। उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि फायरिंग कब बंद होगी और दोनों बच्चियों को आखिरी बार पिता का चेहरा देखने का मौका मिलेगा। जीएमसी में पोस्टमार्टम के दौरान भाई मोहम्मद हुसैन बिलखते हुए कहते हैं कि 16 साल बाद अपने परिवार वालों को साथ रखने के लिए कैंप में ले आया था। पिछले काफी दिनों से उसकी बीवी के पैरों में तकलीफ थी।
उन्होेंने बताया कि शहीद की बीवी को उसका भाई कैंप में छोड़ खुद जम्मू वापस लौट आया। पिछले 15 वर्षों से मंजूर अहमद असम, आंध्र प्रदेश सहित अन्य इलाकों में ड्यूटी पर तैनात था। कुछ वक्त पहले ही उसका जम्मू ट्रांसफर हुआ था। श्रीनगर में घर पर बूढ़ी मां को अपने जवान बेटे का इंतजार है। बीते वर्ष ही ब्रेन हैमरेज से पिता की मौत हो चुकी है। दोनों बच्चियों की उम्र भी कम है। ऐसे में शहीद के भाई को उनकी परवरिश की चिंता सता रही है। पाकिस्तान को खरी खोटी सुनाते हुए शहीद के भाई ने कहा- आखिर कब तक रियासत के युवाओं को आतंकियों का शिकार बनना पड़ेगा। क्या भारत सरकार पाकिस्तान को करारा जवाब देने में समर्थ नहीं है। भाई की पत्नी और दोनों बच्चियों को आखिर किस मुंह से बताएं कि उनका पिता अब इस दुनिया में नहीं है।