जम्मू। फर्जी गन लाइसेंस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने से पहले जम्मू कश्मीर फोरेंसिक लैब श्रीनगर ने जम्मू के तत्कालीन डीसी राजीव रंजन को क्लीन चिट दी। क्लीन चिट दिए जाने के बाद विजिलेंस में दर्ज दो केसों की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। हालांकि इस केस में राजस्थान पुलिस गुड़गांव से तत्कालीन डीसी के भाई को पकड़ चुकी है। उससे 34 फर्जी लाइसेंस बरामद किए गए थे।
जम्मू कश्मीर सरकार ने इस मामले को गंभीरता लेते हुए राजीव रंजन के हस्ताक्षर और कुछ गन लाइसेंस को जम्मू कश्मीर फोरेेंसिक लैबोरेटरी श्रीनगर कश्मीर को भेजी गई। लैब के सहायक साइंटिफिक अधिकारी फरहत अमन कार ने रिपोर्ट दी है कि जो लाइसेंस उन्हें मिले हैं। उन पर राजीव रंजन के हस्ताक्षर हैं। राजीव रंजन ने भी अपने हस्ताक्षर लैब को सौंपे थे। लैब को 27 जुलाई 2018 को सभी दस्तावेज मिले और तीन दिन के भीतर ही पूरी रिपोर्ट सौंप दी गई।
लैब ने रिपोर्ट दी है कि हस्ताक्षरों को अलग अलग तरीकों से लिया गया। एक से लेकर 16 तक भेजे गए लाइसेंसों की जांच की गई। तीन लाइसेंसों में फर्क नजर आया। उसके बाद डीसी राजीव रंजन के हस्ताक्षर लिए गए। फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट के बाद अब जांच सीबीआई के हवाले है। सीबीआई ने फिलहाल केस की जांच शुरू नहीं की है।
राजस्थान पुलिस द्वारा आपरेशन जुबैदा के तहत तीन हजार से अधिक लाइसेंस को जब्त किया गया जो फर्जी थे और इसी कड़ी में जम्मू के तत्कालीन डीसी के भाई को पकड़ा गया। फर्जी गन लाइसेंस का रैकेट जम्मू कश्मीर से लेकर पूरे उत्तरी भारत में फैला है। केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान सेवानिवृत्ति के बाद नौकरी पाने की इच्छा से लाइसेंस बनाते हैं। लाइसेंस बनाने के बाद कई बार फर्जीवाड़े में फंस जाते हैं।