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मछलियाें की मौत के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हुआ गंभीर

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सांबा। कस्बे के बसंतर दरिया में वीरवार को सैकड़ों मछलियों की मौत होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस बात के लिए गंभीर हुआ है कि कारखानों में लगा इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) चालू है या नहीं। बोर्ड के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र फेज-प्रथम में 200 कारखानों में से मात्र 31 इकाइयों में ही ईटीपी लगा है। इसमें भी कई के काम नहीं करने की सूचनाएं हैं।
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बसंतर दरिया में मछलियों की मौत होने के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में बात सामने यह आ रही है कि फेज-प्रथम के कारखानों से केमिकल युक्त पानी बिना शुद्ध किए ही फेंका जा रहा है, जो बसंतर दरिया में मिल रहा है। इससे सैकड़ों मछलियों की मौत हुई है। सवाल यह उठता है कि जब मछलियों की मौत हुई तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर कारखानों में ईटीपी क ी जांच के लिए गंभीर हो गए। इससे पूर्व उनकी टीम क्या कर रही थी। दूसरी तरफ आम लोग भी जांच कराने के लिए जोर दे रहे हैं। लोगों के अनुसार कि मछलियां मरने के उपरांत ही विभाग केमिकल कारखानों में लगे ईटीपी प्लांट की जांच करने में जुटा है। इससे पहले ऐसा क्यों नहीं किया गया।
ग्रामीण बोधराज, राजेश सिंह, जगदीश आदि ने कहा कि केमिकल कारखानों से निकलने वाले प्रदूषण के कारण किसान निराश हो गए हैं। पहले चक रामचन्द, और रैपर क्षेत्र सब्जी उत्पादन में नंबर एक हुआ करता था। क्षेत्र की सब्जी सांबा, जम्मू, दियालाचक, उधमपुर तक जाती थी, लेकिन सांबा में केमिकल कारखानों के कारण किसान सब्जी की खेती से हाथ धो बैठे हैं। जो किसान मंडियों में सब्जी बेचा करते थे, आज बाजार से खरीद कर खा रहे हैं। यही नहीं कई मबेशी भी मारे जा चुके हैं।
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बसंतर दरिया के पानी पीने से गुज्जर समुदाय के साथ सीमावर्ती गांवों के किसानों के मवेशी भी मारे जा चुके हैं। इस बारे में जिला प्रशासन के साथ चुने हुए प्रतिनिधियों को भी अवगत करा चुके हैं, लेकिन कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है। बसंतर दरिया में मछलियों के मरने के बाद ही प्रशासन गंभीर हुआ है।
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