कश्मीरी अलगाववादी संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के नेता यासीन मलिक को करारा झटका लगा है। गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम ट्रिब्यूनल ने जेकेएलएफ-वाई पर लगे बैन को बरकरार रखा है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि जेकेएलएफ-वाई को गैरकानूनी संगठन करार देने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। साथ ही कहा कि जेकेएलएफ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सरकार के पास विश्वसनीय आधार मौजूद हैं।
यासीन को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जज के सामने पेश किया जाएगा। 25 जनवरी 1990 को श्रीनगर शहर में यह वारदात हुई थी। 1989 में पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी के अपहरण मामले में भी यासीन का नाम शामिल है। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
पुलवामा हमले के 8 दिन बाद 22 फरवरी को यासीन मलिक को गिरफ्तार किया था। इसी साल मार्च में केंद्र सरकार ने जेकेएलएफ को आतंक विरोधी कानून (UAPA) के तहत बैन कर दिया था।