जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने आतंकवाद से जुड़े मामले में जब्त कार की कस्टडी देने से इन्कार कर दिया है। आरोप है कि इस कार को हथियार और गोला-बारूद ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता पहले ही वाहन का कब्जा पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये किसी और को सौंप चुका था।
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने आतंकवाद से जुड़े मामले में जब्त कार की कस्टडी देने से इन्कार कर दिया है। आरोप है कि इस कार को हथियार और गोला-बारूद ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता पहले ही वाहन का कब्जा पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये किसी और को सौंप चुका था। ऐसे में उसे कस्टडी मांगने का कोई अधिकार नहीं। न्यायमूर्ति सिंधु शर्मा और न्यायमूर्ति शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने यह फैसला रुबीना बेगम की ओर से दायर याचिका पर सुनाया है। यह याचिका कुपवाड़ा की विशेष अदालत के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। इसमें आर्म्स एक्ट और यूएपीए के प्रावधानों के तहत जब्त वाहन को छोड़ने की उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी।
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अदालत ने वाहन के आतंकी गतिविधियों से हुई कमाई के मुद्दे पर भी विचार किया। टिप्पणी की कि जांच एजेंसी को यूएपीए के अध्याय-5 के तहत तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के इस विचार को भी सही ठहराया कि यह अर्जी रजिस्टर्ड मालिक के जरिये वाहन को छुड़ाने का एक गलत प्रयास था। इससे अभियोजन पक्ष के मामले को नुकसान पहुंच सकता था। यह मानते हुए कि अपीलकर्ता के पास अपील करने का अधिकार नहीं। हाईकोर्ट ने अपील के साथ-साथ उससे जुड़ी अन्य अर्जियों को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में आदेश की एक प्रति एसएसपी कुपवाड़ा को भी अनुपालन के लिए भेजे जाने के निर्देश दिए।