एयर कंपनियों की ओर से विमानों के अत्यधिक किरायों के संबंध में चैंबर आफ कामर्स के पूर्व प्रधान वाईवी शर्मा और एडवोकेट बलदेव सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई की। इस दौरान विमानों के किरायों के संबंध में दायर याचिका में कहा गया कि विभिन्न एयर लाइंस कंपनियां यात्रियाें से ज्यादा किराया वसूलती हैं, जिसके कारण विमान यात्रियों पर ज्यादा बोझ पड़ता है।
जनहित याचिका के मामले में सीनियर एडवोकेट बीएस सलाथिया और एडवोकेट मीनाक्षी सलाथिया ने दलीलें सामने रखते हुए कहा कि विमानों के किरायों में बढ़ोतरी के संबंध में 2/2010 नंबर से सर्कुलर जारी किया था। इस मौके पर खंडपीठ ने पाया कि दिल्ली से श्रीनगर और जम्मू से श्रीनगर के विमान यात्रा में एयरलाइंस कंपनियों की ओर से बढ़ाए किरायों के संबंध में याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी सिविल एवीएशन के डायरेक्टर जनरल को काउंटर हलफनामा दाखिल करने के बारे में सूचना नहीं दी थी।
इस मौके पर खंडपीठ ने कहा कि विमानों के किरायों और इससे यात्रियों को हो रही परेशानी के संबंध में याचिकाकर्ता को पूरी आजादी है कि वह अपनी बात को सामने रखे। साथ ही डायरेक्टर जनरल से इस संबंध में बात करे। खंडपीठ के मुख्य न्यायाधीश एनपाल वसंथाकुमार और न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर ने मामले को निपटाते हुए याचिकाकर्ता को सिविल एवीएशन के डायरेक्टर जनरल से बातचीत कर मामले को सुलझाने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि डायरेक्टर जनरल के साथ होने वाली बातचीत के संबंध में याचिकाकर्ता की ओर से रिपोर्ट पेश होने के बाद खंडपीठ की ओर से तीन महीने के भीतर फैसला लिया जाएगा।
जेएनएफ