जम्मू। जम्मू-कश्मीर सेवा चयन आयोग (पीएससी) की चयन सूची जीवित दस्तावेज नहीं है, जिसे अनिश्चितकाल तक बढ़ाया जा सके। नियम 64 के अनुसार इसकी वैधता एक वर्ष तक सीमित है और यह स्वतः समाप्त हो जाती है। इस टिप्पणी के साथ जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय कुमार और संजय परिहार की खंडपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) जम्मू पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें उच्च शिक्षा विभाग को चार एसोसिएट प्रोफेसरों को राजकीय डिग्री कॉलेजों में प्रिंसिपल नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि अधिकरण ने दिसंबर 2022 की लोक सेवा आयोग (पीएससी) चयन सूची की वैधता को नवंबर 2023 से आगे बढ़ाकर कानून का गलत अर्थ निकाला। यह विवाद प्रो. आरती पांढो गुप्ता, नरेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार शर्मा और अनीता जमवाल से संबंधित था। इन्हें पीएससी ने प्रिंसिपल पद पर पदोन्नति के लिए पैनल में शामिल किया था। कैट ने तीन सरकारी आदेशों (2024) को निरस्त कर उनकी नियुक्ति का आदेश दिया था। जेएनएफ