- सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी की याचिका पर सुनाया फैसला
- बिना आरोपपत्र और नोटिस के पासपोर्ट जब्ती को बताया मौलिक अधिकारों का हनन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि केवल एफआईआर दर्ज होने के आधार पर किसी नागरिक का पासपोर्ट जब्त नहीं किया जा सकता। यह न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि व्यक्ति के विदेश यात्रा के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन है। अदालत ने यह फैसला सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सज्जाद अहमद खान की याचिका पर सुनाया, जिनका पासपोर्ट जांच एजेंसी ने बिना नोटिस और आरोपपत्र के जब्त कर लिया था।
खान के खिलाफ 2012 से 2016 के बीच जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से हथियार लाइसेंस जारी करने के मामले में सीबीआई जांच कर रही है। 2021 में उनके घर की तलाशी के दौरान पासपोर्ट, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए थे। हालांकि, अब तक कोई आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है। खान के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल धार्मिक तीर्थयात्रा (हज या उमरा) पर जाना चाहते थे और जांच में पूरा सहयोग दे चुके हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल एफआईआर दर्ज होना आपराधिक कार्यवाही की स्थिति नहीं बनाता। जब तक आरोप पत्र दाखिल कर अदालत संज्ञान न ले, तब तक उसे लंबित कार्यवाही नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना उचित नोटिस दिए और सुनवाई का अवसर दिए पासपोर्ट जब्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। अदालत ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया है कि या तो खान को पासपोर्ट जारी किया जाए या औपचारिकताएं पूरी कर नया पासपोर्ट दिया जाए।