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Jammu News: कैट ने रिटायरमेंट के 25 साल बाद सुनाया पेंशन का लाभ देने का आदेश

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- 2000 में रिटायर हुआ था कर्मचारी, 2009 में निधन
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- अब मृतक की पत्नी को मिलेगी पारिवारिक पेंशन



अमर उजाला ब्यूरो



जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जम्मू पीठ ने एक मामले में रिटायरमेंट के 25 साल बाद मृतक कर्मचारी की पत्नी को पारिवारिक पेंशन का लाभ देने का आदेश दिया है। कर्मचारी साल 2000 में शिक्षा विभाग से रिटायर हुआ था। 2009 में उसकी मृत्यु भी हो गई। मामले का फैसला सुनाते हुए कैट ने कहा कि प्रशासनिक चूक के कारण किसी कर्मचारी को परेशान नहीं किया जा सकता।



जम्मू जिले की परगवाल तहसील के रहने वाले फकीर चंद को साल 1964 में पाठशाला शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया। साल 1994 में फकीर चंद को जनरल लाइन शिक्षक के रूप में नियुक्ति प्रदान करने का आदेश विभाग ने जारी किया, लेकिन अधिकारियों की ओर उसे कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी गई। कर्मी को हाईकोर्ट में रिट दाखिल करनी पड़ी। हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति देने का निर्देश दिया। फकीर चंद ने 23 मार्च 1999 को कार्यभार ग्रहण किया और 30 सितंबर 2000 को वह रिटायर हो गए। रिटायरमेंट के बाद शिक्षा विभाग ने पेंशन देने के मना कर दिया। कर्मी ने फिर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने फकीर चंद के पक्ष में फैसला सुनाते हुए शिक्षा विभाग को पेंशन जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने आदेश दिया। हालांकि मामले का निपटारा होने से पहले ही 12 नवंबर, 2009 को फकीर चंद की मृत्यु हो गई।
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इसके बाद फकीर चंद की पत्नी चंचला देवी ने पेंशन का दावा किया। जिसे महालेखाकार ने इस आधार पर खारिज कर दिया कि फकीर चंद ने पारिवारिक पेंशन के लिए निर्धारित समय अवधि तक नौकरी नहीं की। इस पर चंचला देवी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। जिसे 2021 में कैट को हस्तांतरित कर दिया गया। फैसला सुनाते हुए कैट के न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा ने कहा कि फकीर चंद की नियुक्ति नई पेंशन योजना के लागू होने से पहले हो गई थी। अधिकारियों की लापरवाही से उसे जॉइन करने में समय लगा। कर्मी की पत्नी भी पारिवारिक पेंशन की हकदार है।
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