मामले में पीओके का पक्ष सुनने के लिए भी आवेदन
पीओके की 24 आरक्षित सीटों में से दस को विधानसभा में शामिल करने की जरूरत पर जोर
जम्मू। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पांच सदस्यों को मनोनीत करने के लिए उपराज्यपाल को दी गई शक्ति को चुनौती देने वाली याचिका के मामले में जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सरकार को 20 मार्च तक अपना पक्ष रखने को कहा है। पांच विधायकों के मनोनीत न होने पर आगामी बजट सत्र में ये सदस्य शामिल नहीं होंगे। एक अन्य आवेदन में भी सरकार से पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) की सीटों पर पक्ष रखने को कहा गया है।
कांग्रेस के पूर्व एमएलसी रवींद्र शर्मा की याचिका पर न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायाधीश राजेश सेखरी की खंडपीठ ने कहा कि अगली सुनवाई में पांच सदस्यों को मनोनीत करने के मामले में दोनों पक्ष अपनी दलीलें पूरी करें। एक अन्य आवेदन में पीओके से 1947 में विस्थापित हुए लोगों के पक्ष को भी इस मामले में सुनने को कहा गया है। रवींद्र सिंह सेवानिवृत्त जेकेएएस अधिकारी व अन्य द्वारा पार्टी के रूप में अभियोग लगाने की मांग की याचिका पर पीओके से 1947 में विस्थापित हुए लोगों की गैर-प्रतिनिधित्व श्रेणी की राजनीतिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पीओके के लिए आरक्षित 24 सीटों में से 10 सीटों को जम्मू कश्मीर की विधानसभा में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। अधिवक्ता शेख शकील अहमद के माध्यम से दायर की गई याचिका में बताया गया कि
पीओके विशेष रूप से तहसील प्लांडरी और बाग से 1947 के विस्थापित व्यक्ति हैं, जो अब पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं। पीओके के लिए 25 सीटें निर्धारित की गई थीं। 1975 में जम्मू-कश्मीर संविधान 12वें संशोधन अधिनियम, 1975 के तहत एक सीट को डीफ्रीज करके 24 कर दिया गया। लेकिन विवादित प्रावधानों के आधार पर पीओके के विस्थापित व्यक्तियों के लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में केवल एक सीट निर्धारित की गई है। न्यायालय उन्हें पक्ष प्रतिवादी के रूप में सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करे। जैसा कि पहले जम्मू-कश्मीर संविधान 12वें संशोधन अधिनियम, 1975 के तहत मुजफ्फराबाद, पुंछ और मीरपुर जिलों से पलायन करने वाले लोगों के विशेष संदर्भ में किया गया था। जेएनएफ