- अदालत का तर्क, जमानत अर्जी समय से पहले और बिना योग्यता के
- कठुआ में आतंकियों को खाने-पीने के सामान समेत दी थी पनाह
जम्मू। कठुआ के हीरानगर आतंकी हमले से जुड़े मामले में तीन गाइडों की जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी। आशिक अली उर्फ अखी, अशरफ अली उर्फ शीफू और लाल हुसैन ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर तीसरे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जम्मू मदन लाल ने सुनवाई की। बीते वर्ष हुए हमले में सीआरपीएफ जवान बलिदान हो गया था। आरोप है कि उक्त तीनों आरोपी आतंकियों के गाइड थे।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि तथ्य व नियम के अनुसार यूए (पी) अधिनियम की धारा 43 (डी) के तहत जमानत देने पर वैधानिक प्रतिबंध इस स्तर पर लागू है। जमानत की अर्जी समय से पहले और बिना योग्यता के है। इसलिए इसे न तो स्वीकार किया जा सकता है और न ही जमानत दी जा सकती है।
जून, 2024 में पुलिस के पास दर्ज मामले के अनुसार, आरोपी पशु तस्कर हैं। ये पकड़े जाने के दिन कठुआ जिले के मथरा चक से सान्याल, शेरपुर, कट्टल गुजरान से बेईं नाला होते हुए पैदल सांबा के बसंतर तक मवेशियों को ले जा रहे थे। तभी गोरक्षा समिति के सदस्यों ने उनका पीछा किया। तीनों आरोपी चार अन्य तस्करों के साथ मवेशियों को छोड़कर भाग रहे थे। भागते हुए इन लोगों की लाला चक में तीन आतंकियों से मुलाकात हुई। यहां इन लोगों ने आतंकियों को मोबाइल फोन, खाने-पीने के अलावा पनाह दी। जेएनएफ