जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में जज पूरे न होने की वजह से मामलों की सुनवाई त्वरित गति से नहीं हो पा रही। जजों के स्वीकृत पद 25 हैं, लेकिन आठ पद खाली हैं। अप्रैल तक यह तस्वीर बदलने की संभावना है। नियुक्ति अभी प्रक्रियाधीन है।
वर्तमान में हाईकोर्ट में 3,46,936 मामले लंबित हैं। नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड यानी एनजेडीजी के आंकड़ों के अनुसार 2,29,140 मामले क्रिमिनल, जबकि 1,17,796 सिविल के हैं। जानकारों के अनुसार जजों की कमी के कारण यह स्थिति बनी है। एक दिन में कोर्ट में सिविल और क्रिमिनल मिलाकर औसतन डेढ़ सौ से भी अधिक मामले दर्ज होते हैं। ताजे दर्ज मामलों पर सुनवाई होती है, लेकिन लंबित मामले ज्यों-के-त्यों रहते हैं। स्थिति में बदलाव तभी आ सकता है जब न्यायाधीशों के पदों की संख्या बढ़ाई जाए। इससे न्यायिक प्रक्रिया को गति मिलेगी और जजों पर काम का बोझ कम होगा। ई-कोर्ट जैसी पहल की वजह से अदालतों में दस्तावेज संंबंधी काम बहुत सरल हुआ है। अब न्यायिक प्रक्रिया को और तेज किए जाने की आवश्यकता है।
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में दर्ज मामलों की संख्या और सुनवाई को देखते हुए जजों की संख्या 35-40 होनी चाहिए। हमने यह मुद्दा उठाया है। अभी केवल 17 जजों पर काम का बोझ है। यह स्थिति बदलने की आवश्यकता है।
गगनदीप सिंह लकी, पूर्व उपाध्यक्ष, यंग लॉयर्स एसोसिएशन।