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सरकारी कर्मचारी के पास स्थानांतरण से इन्कार का कोई अधिकार नहीं : कैट

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केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने मुख्तार अहमद मीर की याचिका को किया खारिज
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जम्मू। स्थानांतरणीय (ट्रांसफरेबल) पद पर कार्यरत सरकारी कर्मचारी को एक से दूसरे स्थान पर तैनात किया जा सकता है। उसे एक ही स्थान पर तैनात रहने का कोई निहित अधिकार नहीं है। यह महत्वपूर्ण आदेश राजिंदर सिंह डोगरा सदस्य (जे) केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने मुख्तार अहमद मीर द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए पारित किया।
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मुख्तार अहमद मीर ने 14 मई, 2024 के सरकारी आदेश में राहत की मांग की थी, जिसके तहत आवेदक को उसके वर्तमान पोस्टिंग स्थान राजकीय डिग्री कॉलेज बनिहाल (जोन सी) से जीडीसी रामबन (जोन सी) में स्थानांतरित किया गया है। वर्तमान मामले में कैट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आवेदक के वकील ने उस मूल आवेदन के माध्यम से ट्रिब्यूनल से संपर्क किया था, जिसे 22 दिसंबर 2023 को टिप्पणियों के साथ निपटाया गया था। कैंट ने कहा कि 13 मई 2024 के वर्तमान मूल आवेदन के माध्यम से आक्षेपित आदेश को चुनौती दी गई है। कैट ने सरकार के प्रमुख सचिव की ओर से पारित आदेश का अध्ययन किया है और निष्कर्ष निकला कि प्रमुख सचिव ने सोच-समझकर आदेश पारित किया है, जिससे आवेदक के मामले पर विचार किया जा सके। इसके परिणामस्वरूप मामले को सक्षम प्राधिकारी ने खारिज करते हुआ कहा कि सरकारी कर्मचारी जम्मू-कश्मीर में कहीं भी सेवा करने के लिए बाध्य हैं। कैट ने पाया कि इस प्रकार मामले तथ्यों, परिस्थितियों और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए उपरोक्त निर्णयों में की गई टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए हैं। ऐसे में न्यायालय का मानना है कि वर्तमान में आवेदक की ओर से लगाए गए आरोप में कोई दुर्भावना नहीं है। मामला न ही किसी वैधानिक नियम का उल्लंघन है और आवेदक के मामले पर प्रतिवादी-विभाग की ओर से विषय पर प्रासंगिक लागू नियमों व बाध्यकारी निर्देशों के प्रावधानों के अनुसार विचार किया गया है। इन टिप्पणियों के साथ कैट ने याचिका खारिज कर दी। जेएनएफ
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