शहर में ध्वनि प्रदूषण के संबंध में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस ताशी राबस्तन की खंडपीठ ने डीसी जम्मू और एसएसपी से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
खंडपीठ ने कहा कि नौ मई 2014 को अदालत द्वारा जारी आदेश को कहां तक लागू किया गया, इसकी रिपोर्ट मामले की अगली तिथि पर पेश की जाए, अन्यथा डीसी और एसएसपी स्वयं अदालत में पेश हों।
खंडपीठ ने पाया कि अदालत ने ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया था। इस संबंध पर राज्य के आला अधिकारियों की राय ली गई थी। और जिसमें जिला मैजिस्ट्रेट ने सलाह दी थी कि अपने क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण नियम लागू करें।
अब अदालत ने इस संबंध में रिपोर्ट भी मांगी थी। एजीसी जम्मू को इस संबंध में नोटिस भी निकालने को कहा गया था। खंडपीठ ने बिश्नाह के एग्जक्यूटिव मैजिस्ट्रेट द्वारा किए गए प्रयासों की कुछ हद तक सराहना की।
बिश्नाह के एग्जक्यूटिव मैजिस्ट्रेट ने इलाके के तमाम धार्मिक स्थलों के संचालकों को बुलाकर माइक की ध्वनि कम करने के लिए उन्हें जागरूक किया गया। इसके परिणाम स्वरूप ध्वनि प्रदूषण में कमी आई है। खंडपीठ ने कहा कि नौ मई 2014 के आदेशानुसार तमाम एसएचओ को भी रिपोर्ट फाइल करनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
अदालत ने आदेश दिया कि मामले की अगली सुनवाई के दौरान तमाम एसएचओ एक्शन रिपोर्ट पेश करें। यदि वे इसमें असफल रहते हैं तो जम्मू के डीसी और एसएसपी स्वयं अदालत में उपस्थित हों।