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जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचारियों की संपत्ति अटैच करने के लिए जरूरी होगी कोर्ट की मंजूरी

Wed, 09 Oct 2019 04:49 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

  • 31 अक्तूबर के बाद बदल जाएंगे एंटी करप्शन ब्यूरो के कार्रवाई के नियम
  • सेवानिवृत्त कर्मी पर कार्रवाई के लिए भी सरकार की अनुमति लेनी होगी 
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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचार के मामलों में दो अहम बदलाव हो जाएंगे। 31 अक्तूबर के बाद जम्मूृ-कश्मीर और लद्दाख में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के भ्रष्टाचार निरोधक नियम-कानून में परिवर्तन होगा। दोनों बदलाव भ्रष्टाचार से संबंधित पर मौजूदा कार्यप्रणाली को कमजोर कर सकते हैं। 
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मौजूदा एक्ट में राज्य के एसीबी को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। एसीबी किसी भी भ्रष्टाचारी की संपत्ति को अटैच कर सकता है लेकिन नए पीसी एक्ट में ऐसा नहीं होगा। एसीबी को ऐसी किसी भी संपत्ति को अटैच करने से पहले संबंधित कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा दूसरा बड़ा बदलाव पूर्व सरकारी कर्मियों को लेकर होगा। मौजूदा समय में किसी भी सेवानिवृत्त सरकारी कर्मी पर एसीबी सीधी कार्रवाई करता है। 

नए पीसी एक्ट के तहत सरकारी कर्मी पर कार्रवाई करने से पहले सरकार से मंजूरी हासिल करनी पड़ेगी। राज्यपाल शासन या निर्वाचित सरकार से मंजूरी लेने के बाद ही सेवानिवृत्त सरकारी कर्मियों पर कार्रवाई होगी। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद एसीबी और पुलिस उपराज्यपाल के अधीन होगी।
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जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में हो सकते हैं लद्दाख के मामले
सूत्रों के अनुसार लद्दाख के अलग होने के बाद भी लद्दाख में एसीबी का काम जम्मू-कश्मीर के क्षेत्राधिकार में रह सकता है। लद्दाख में पूरी तरह से ढांचा विकसित होने के बाद इसे अलग किए जाने की संभावना है।

दूसरे कैंडर के स्टाफ आने की भी संभावना
एसीबी में केंद्रीय पीसी एक्ट लगने के बाद बाहरी स्टाफ आने की भी संभावना है। हाल में केंद्र ने दूसरे कैडर के आईपीएस अफसर को जम्मू ट्रांसफर किया है। एसीबी में मैनपावर बढ़ाने की कवायद चल रही है।  
 

"नए पीसी एक्ट में दो बड़े बदलाव हैं। बाकी की कार्यप्रणाली भी केंद्रीय पीसी एक्ट के मुताबिक होगी।"-आनंद जैन, निदेशक, एंटी करप्शन ब्यूरो

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