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Jammu Kashmir: कोरोना वायरस का अंतिम संस्कार पर असर, श्मशान घाट में नहीं बची अस्थि कलश रखने की जगह

Fri, 24 Apr 2020 03:48 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना वायरस ने न केवल जीवन की रफ्तार रोक दी है बल्कि मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार पर भी इसका असर पड़ रहा है। कोरोना वायरस के शिकार हो रहे लोगों के अंतिम संस्कार में जहां उनके अपने भी शामिल नहीं हो रहे हैं, वहीं लॉकडाउन में फंसे कई लोग सामान्य मृत्यु पर पार्थिव शरीर के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के मद्देनजर अपनों की अंत्येष्टि में भी कुछ ही लोग शामिल हो रहे हैं।

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बड़ा संकट अस्थि पुष्प विसर्जन को लेकर खड़ा हो गया है। लॉकडाउन के चलते लोग अस्थि विसर्जन नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में मंदिरों के शहर जम्मू के सभी श्मशान घाटों के लॉकर अस्थि कलशों से भर गए हैं। अस्थियां प्रवाहित करने के लिए लोग लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे हैं। श्मशान घाटों की प्रबंधन कमेटियां अब अस्थि कलश रखने के लिए लॉकरों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही हैं।

जम्मू के शास्त्री नगर श्मशान घाट की प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारी काका गोस्वामी का कहना है कि ऐसे संकट में उपाय भी नहीं सूझ रहा है। हिंदू परंपराओं के अनुसार अस्थियों को हरिद्वार ले जाकर गंगा नदी में प्रवाहित करने की मान्यता है लेकिन लॉकडाउन के चलते पिछले एक माह से ऐसा नहीं हो पा रहा है।

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श्मशान घाट में अस्थि कलश रखने की जगह नहीं बची

ऐसे में श्मशान घाट में अस्थि कलश रखने की जगह नहीं बची है। सभी लॉकर फुल हो चुके हैं। अब लॉकर बढ़ाने पर विचार चल रहा है। जम्मू शहर के सबसे बड़े श्मशान घाट जोगी गेट में भी अस्थि कलश रखने की जगह नहीं बची है।

प्रबंधन समिति के सदस्य योगेंद्र शर्मा के अनुसार श्मशान घाट पर 70 अस्थि कलश रखने के लिए लॉकर रूम बनाया गया है। यह पूरी तरह से भर गया है। अब घाट की दीवार पर ही कील लगाकर अस्थि कलश टांगने पड़ रहे हैं। गौरतलब है कि जम्मू शहर में कोरोना से किसी की मौत नहीं हुई है। वहीं सामान्य या अन्य कारणों से मृत्यु के बाद अस्थियां प्रवाहित नहीं हो रही हैं।
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वीडियो कॉल से अंतिम दर्शन

लॉकडाउन में प्रदेश से बाहर या दूसरे क्षेत्रों में फंसे कई लोग आखिरी समय में अपनों के पास नहीं पहुंच पा रहे हैं। अंत्येष्टि में भी सीमित लोगों के ही शामिल होने की अनुमति है। ऐसे में लोगों को वीडियो कॉल के जरिए अंतिम दर्शन करने पड़ रहे हैं।

देविका-चिनाब में कर रहे अस्थि विसर्जन
जम्मू और आसपास के इलाकों में लोग देविका नदी और चिनाब दरिया में अस्थि विसर्जन को पहुंच रहे हैं। उधमपुर में देविका घाट पर अस्थियां प्रवाहित करने की परंपरा है। सांबा के पुरमंडल, कठुआ के एरवां और कई क्षेत्रों के लोग चिनाब नदी में अस्थियां विसर्जित कर रहे हैं।
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