ऐसे में श्मशान घाट में अस्थि कलश रखने की जगह नहीं बची है। सभी लॉकर फुल हो चुके हैं। अब लॉकर बढ़ाने पर विचार चल रहा है। जम्मू शहर के सबसे बड़े श्मशान घाट जोगी गेट में भी अस्थि कलश रखने की जगह नहीं बची है।
प्रबंधन समिति के सदस्य योगेंद्र शर्मा के अनुसार श्मशान घाट पर 70 अस्थि कलश रखने के लिए लॉकर रूम बनाया गया है। यह पूरी तरह से भर गया है। अब घाट की दीवार पर ही कील लगाकर अस्थि कलश टांगने पड़ रहे हैं। गौरतलब है कि जम्मू शहर में कोरोना से किसी की मौत नहीं हुई है। वहीं सामान्य या अन्य कारणों से मृत्यु के बाद अस्थियां प्रवाहित नहीं हो रही हैं।
लॉकडाउन में प्रदेश से बाहर या दूसरे क्षेत्रों में फंसे कई लोग आखिरी समय में अपनों के पास नहीं पहुंच पा रहे हैं। अंत्येष्टि में भी सीमित लोगों के ही शामिल होने की अनुमति है। ऐसे में लोगों को वीडियो कॉल के जरिए अंतिम दर्शन करने पड़ रहे हैं।
देविका-चिनाब में कर रहे अस्थि विसर्जन
जम्मू और आसपास के इलाकों में लोग देविका नदी और चिनाब दरिया में अस्थि विसर्जन को पहुंच रहे हैं। उधमपुर में देविका घाट पर अस्थियां प्रवाहित करने की परंपरा है। सांबा के पुरमंडल, कठुआ के एरवां और कई क्षेत्रों के लोग चिनाब नदी में अस्थियां विसर्जित कर रहे हैं।