जम्मू-कश्मीर में शांति मिशन पर आए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष उपद्रवियों का खौफ खत्म करने की चुनौती सबसे बड़ी है। बीएसएफ की तैनाती से उपद्रवियों को सख्त संदेश देने की कोशिश जरूर हुई है, लेकिन, श्रीनगर से लेकर घाटी के गांवों तक उपद्रवियों के खौफ का असर अब भी कायम है।
आम लोग भय से प्रदर्शनों में शामिल होते हैं और पैसों का लालच बच्चों को पत्थरबाज बनाता है। आतंकी संगठन निचले स्तर के सरकारी मुलाजिमों पर इस्तीफे के लिए जवाब बनाने लगे हैं। मुख्यधारा के सियासी दलों के कुछ नेताओं में भी उपद्रवियों का खौफ है। हमले की आशंका के मद्देनजर घाटी में कुछ मंत्री अपने सरकारी आवासों में रात नहीं गुजारते हैं।
अलगाववादियों से बातचीत की राह में कई बाधाएं हैं। केंद्र सरकार संविधान के दायरे में ही वार्ता करेगी। अलगाववादियों को लगता है कि इस शर्त पर बातचीत से उनकी दुकानदारी बंद हो सकती है।